Tuesday, October 16, 2012

मीटिंग में डिस्टर्ब नहीं करेंगे टेलीकॉलर

मिस्टर नंबर टैक्स्ट, कॉल  एंड ब्लाक (Mr. Number Text, Call & Block)
ऐसा कम ही होता है कि आप फोन में एक एप्लिकेशन डाउनलोड करें और उस एप्लिकेशन का इस्तेमाल आप कई काम में कर सकें। अगर आप ऐसी एप्लिकेशन अपने फोन के लिए चाहते हैं तो गूगल प्ले पर मिस्टर नंबर के नाम से एप्लिकेशन मौजूद है। जिसके द्वारा आप अपने दोस्तों को फ्री मैसेज कर सकते हैं। अलग-अलग नंबर से एमएमएस के रूप में आने वाली पिक्चर्स को एक ही स्थान सुरक्षित कर सकते हैं, कॉल व मैसेज की सारी हिस्ट्री एक ही जगह पर देख सकते हैं। और सबसे खास बात कि आप इस एप्लिकेशन की मदद से अन वॉन्डेड कॉल से भी छुटकारा पा सकते हैं। सरकार की कोशिशों के बावजूद टेलीकॉलर कंपनियां कॉल  करने से बाज नहीं आती हैं। हर दिन मैसेज और कॉल करके आपको परेशान किया जाता है। मिस्टर नंबर अब आपको इस परेशानी से निजात दिलाएगा। किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल या मैसेज को आप ब्लॉक कर सकते हैं। कॉल ब्लॉक करने के लिए वैसे तो कई सारी एप्लिकेशन आपको मिल जाएंगी लेकिन मिस्टर नंबर जैसी वन इन ऑल एप्लिकेशन जैसे फीचर्स होना मुश्किल है। अगर आप चाहते हैं कि आपके नंबर पर कोई भी स्पैम कॉल न आए तो ऐसी कॉल  को असानी के साथ ब्लॉक किया जा सकता है। यहां कॉल को ब्लॉक करने के अलावा आप वाइस मेल का भी विकल्प मिलता है। जिसको आप सेटिंग में जाकर एडिट कर सकते हैं। गूगल प्ले से आप मिस्टर नंबर टैक्स्ट, कॉल  एंड ब्लॉक को फ्री https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mrnumber.blocker&feature=search_result#?t=W251bGwsMSwxLDEsImNvbS5tcm51bWJlci5ibG9ja2VyIl0. डाउनलोड कर सकते हैं। यहां आपको मैसेजिंग के लिए कोई अलग से पैसे चुकने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन डाटा चार्ज देना पड़ते हैं। फ्री मैसेजिंग और कॉल ब्लॉक करने के खास फीचर्स एप्लिकेशन को शानदार बनाते हैं।  

विंडोज फोन 8 में एचटीसी का दाव



विंडोज फोन को लेकर हलचल तेज है। नए अहसास के साथ लांच होने वाले इन फोन का प्रदर्शन पहले ही किया जा चुका है। पहले सैमसंग ने उसके बाद नोकिया और फिर विंडोज का पुराना साथी एचटीसी इस दौड़ में शामिल है। यह भागमभाग तो सिर्फ फ़ोन प्रदर्शन के लिए थी, असली मज़ा तो अब आयेगा क्यूंकि अब बारी है इनके लांच की।

प्रदर्शन में तो सैमसंग बाजी मार गया और इसका अंत एचटीसी से हुआ लेकिन लांच के इस दौड़ में बाजी उलटी दिखाई दे रही है। इस बार सैमसंग और नोकिया को पीछे छोड़ एचटीसी बाजी मारने की तैयारी में है। 2 नंवबर को नोकिया ने विंडोज फोन8  लुमिया 920 को पेश करने की तैयारी की  है और माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज़ फोन आपरेटिंग 29 अक्टूबर को लांच होना है।इससे पहले ही एचटीसी विंडोज फोन 8एक्स या 8एस में से किसी एक को लांच करने का मन बना चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एचटीसी इसी सप्ताह अपना विंडोज फोन पेश कर सकता है। फोन के नाम के बारे फिलहाल अभी कोई अता-पता नहीं है लेकिन यह तय है कि फ़ोन के स्पेसिफीकेशन में कोई बदलावा नहीं होगा और इसकी कीमत 30,000 रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है।

ऐसा  पहली बार नहीं है, एचटीसी ने विंडोज आपरेटिंग 7.5 पर रडार को भारत में सबसे पहले पेश किया था। हां, इसका लाभ कंपनी को कितना मिला था यह बताना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि उस वक्त विंडोज मैंगो आपरेटिंग इतना लोकप्रिय नहीं था जितना कि आज। ऐसे में सबसे पहले लांच करने का लाभ कंपनी को मिल सकता है।

Sunday, October 14, 2012

कब खाएंगें जेली बीन?

लगभग तीन महीन पहले ही एंडरायड के नवीन आपरेटिंग सिस्टम 4.1 जेली बीन (Android Operating System 4.1 jelly bean) को अधिकारिक तौर लौंच  किया जा चुका है। बावजूद इसके आज बहुत कम ही फोन में इस आपरेटिंग पर देखने को मिल पायें हैं। भारत में फिलहाल सिर्फ कार्बन टैबलेट और सैमसंग गैलेक्सी नोट 2 (Samsung Galaxy Note2 N7100) एंडरायड आपरेटिंग सिस्टम 4.1 का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि गूगल ने अपने टैबलेट नेक्सस7 के लिए भी इसकी घोषणा कर दी है लेकिन अभी यह भारत में मौजूद नहीं है।

ऐसे में दिमागी घोड़े दौड़ने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो अब तक जेली बीन आपरेटिंग सिस्टम के प्रति मोबाइल निर्माता कोई खास तवज्जु नहीं दिखा रहे हैं। तीन महीने का वक्त कम नहीं होता। गैलेक्सी नोट 2 को छोड़ दें तो इन तीन महीनों में कई फोंस लांच किये जा चुके हैं लेकिन सभी डिवायस एंडरायड ओएस  4.0 आइसक्रीम सैंडविच या 2.3 जिंजर ब्रेड पर ही देखने को मिले हैं।

इस बारे में मोबाइल जगत के एक महानुभव कहते हैं एंडरायड आपरेटिंग सिस्टम 4.1 जेली बिन के साथ अभी कुछ समस्याएं हैं। इस वजह से फोन में बड़े पैमाने पर इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। हालांकि यह बात किस आधार पर कही गई यह बताने में वे जरा कतरा रहे थे लेकिन फिलहाल जेली बीन ओएस के प्रति मोबाइल निर्माताओं की अरुचि इस बात को सत्य की साबित करती है।

ऐसे में गूगल जी से हमारा नम्र निवेदन यह है कि सर जी, जींजर ब्रेड के नास्ते से उपभोक्ता उब चुके हैं और तीनो पहर आइसक्रीम सैंडविच ही खा रहे हैं। थोड़ा स्वाद में अब बदलाव किजिए। अगर जेली बीन के साथ समस्याएं हैं तो जल्द दूर किजिए। क्योंकि अब तक दूर से उसे देखकर ही संतोष करना पड़ रहा है। जरा उपभोक्ता को जेली बीन का भी स्वाद चखने दें। नहीं तो इस देरी के चक्कर में यदि माइक्रोसोफ्ट की आठवीं खड़की (विंडोज फोन 8) खुल जाएगी तो उपभोक्ता उसमे प्रवेश कर जायेंगे फिर लोगों जेली बीन को भूल जाएंगे।

Wednesday, October 10, 2012

इन्फ्रा-रेड की वापसी!

क्या आपको मालूम है कि सैमसंग द्वारा लांच किए गए नए टैबलेट नोट 10.1 में इन्फ्रारेड पोर्ट है! जी हां, कंपनी ने इस टैबलेट में इन्फ्रारेड पोर्ट का उपयोग किया है जिसके माध्यम से आप गैलेक्सी नोट 10.1 का उपयोग टीवी और एसी के रिमोट के लिए भी कर सकते हैं।

वर्ष 2007-08 तक इन्प्रफारेड पोर्ट तकनीक मोबाल फोन में बेहद ही लोकप्रिय थी। खासकर सोनी एरिक्सन के फोन में इसका उपयोग बड़े पैमाने पर देखा जा सकता था। जहां डाटा ट्रांसफर के लिए लोग इसका उपयोग करते थे। परंतु पिछले कुछ वर्षों से मोबाइल फोन से यह गायब ही हो गई थी। अब एक बार फिर से सैमसंग ने इसका उपयोग किया है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि यह पहली बार है जब सैमसंग पुराने तकनीक को नए रूप में पेश कर रहा है। इससे पहले भी कंपनी कई बार ऐसा कर चुकी है और खास कर नोट सीरीज में तो अक्सर ऐसा कुछ देखने को मिलता ही है। आपको याद होगा जब नोट को स्टायलस के साथ लांच किया गया था और यह वह दौर था जब कंपनिया कपैसिटिव स्क्रीन तो छोड़ रजीस्टीव स्क्रीन के साथ भी स्टालस का प्रयोग बंद कर चुकी थी। 

आसूस पैडफ़ोन - अमां एक फ़ोन से क्या-क्या करवाओगे?




हमने अनेक उपकरण देखे हैं लेकिन इनमे से कुछ ही बहुत यादगार होते हैं। और हम बिना हिचके यह कह सकते हैं कि इनमे से एक आसूस का पैडफ़ोन है। एक अकेले फ़ोन को इतनी मेहनत करते हुए तो हमने कभी नहीं देखा है। ज़रा सोचिये, पहले तो बिचारा फ़ोन का काम करता है AMOLED डिस्प्ले, आठ मेगापिक्सेल के कैमरे, एंड्रोएड ४.० (आईस क्रीम सैंडविच), और डूअल कोर प्रोसेसर के साथ। 
 उसके बात यह टैबलेट का काम करता है जब इसे डाला जाता है दस इंच के डिस्प्ले के टैबलेट के अन्दर - और जी हाँ, इस दौरान भी आप इससे फ़ोन कॉल कर सकते हैं। 

और इससे भी अगर काम नहीं बने तो आप इसमें लगा सकते हैं एक कीबोर्ड डॉक और टाईप कर सकते हैं एकदम लैपटॉप की तरह। 


और यही नहीं, अभी और है - आप इसके साथ मिले स्टाईलस के साथ न ही केवल टैबलेट और फ़ोन पर लिख सकते हैं और चित्र बना सकते हैं, बल्कि इसका उपयोग हेडफ़ोन के रूप में भी कर सकते हैं। 


और सरकार, अभी किस्सा ख़त्म कहाँ हुआ है - पैडफ़ोन में हैं पूरी तीन बैटरियाँ: एक फ़ोन के अन्दर, एक टैबलेट में, और एक कीबोर्ड में। तो आप सोच सकते हैं कि यह उपकरण एक बार चार्ज करने से कितनी देर तक चल सकेगा - अजी घंटों की नहीं, दिनों की बात कीजिये।

 अब हम ये नहीं कहेंगे कि यह दुनिया का सर्वश्रेष्ठ उपकरण है - इसके कुल मिलाकर (टैबलेट और कीबोर्ड के साथ) भार लगभग डेढ़ किलो है, सारे सॉफ्टवेयर टैबलेट और फ़ोन पर एक समान काम नहीं करते, और  लगभग पैसंठ हज़ार रुपयों का  इसका दाम कुछ ज्यादा ही है (उतने में तो आप एक नया आईपैड, एक स्मार्टफ़ोन और एक कीबोर्ड खरीद सकते हैं) - लेकिन हाँ, इस बात की ज़रूर दाद देनी होगी कि आसूस ने एक फ़ोन से ज़बरदस्त मेहनत करवाई है। 

आसूस पैडफ़ोन बिक्री के नए रिकॉर्ड तो नहीं बनायेगे, लेकिन उसने यह ज़रूर सिद्ध कर दिया है कि एक स्मार्टफोन क्या-क्या कर सकता है। अब इसमें और क्या लगोगे, आसूस? 

Sunday, October 7, 2012

प्रोसेसर भैया, आपके कोर कर रहे हैं बोर!



कुछ साल पहले की बात है - सारे कंप्यूटर दिखने में लगभग एक जैसे होते थे. फर्क होता था तो सिर्फ उनके प्रोसेसर और RAM में । अब वही गंगा स्मार्टफ़ोनों की दुनिया में भी बह रही है, और ख़ास कर एंड्रोएड फ़ोनों के मामले में । जब कोई नया एंड्रोएड फोन बाज़ार गर्माता है, तो उसमे ज़्यादातर वही गुण होते हैं जो अन्य उच्च कोटि के एंड्रोएड उपकरणों में होते हैं - बड़ा और शानदार डिस्प्ले, एंड्रोएड का ख़ास संस्करण, अच्छा कैमरा, इत्यादि । जब हम सवाल उठाते हैं की भई, आखिर इसमें कौन सा नया पैंतरा है, तो दस बार में से आठ बार जवाब आता है - हुज़ूर, इसमें फलां कोर का प्रोसेसर है जो हर काम ज़्यादा तेज़ी से करता है ।

शुरू शुरू में यह बात हजम हो जाती थी, लेकिन आजकल हमें इसे पचाने के लिए टेक हाजमोला की ज़रूरते पड़ रही है । क्योंकि सच बात तो यह है कि हमें इन महा कोर युक्त प्रोसेसरों का फायदा पता नहीं चल रहा - चोटी के एंड्रोएड फ़ोन लगभग अब भी उसी गति से दौड़ रहे हैं जितना की दो साल पहले । और उनके कार्यक्षेत्र में कुछ ख़ास विस्तार भी नहीं हुआ है - ज़्यादातर लोग इन फ़ोनों का इस्तेमाल अभी भी इन्टरनेट ब्राउज़िंग, ई-मेल, फेसबुक, ट्विट्टर, खबर बताने वाले ऐप्प्स और कुछ हलके-फुल्के खेलों के लिए ही करते हैं । जिन भारी भरकम कार्यों के लिए डूअल और क्वाड कोर प्रोसेसर बने हैं (HD वीडियो संपादन, भारी ग्राफिक्स वाले खेल) उनका इस्तेमाल अधिक नहीं होता । और क्योंकि संसार के ज़्यादातर एंड्रोएड फ़ोन तेज़ प्रोसेसरों के साथ नहीं आते, अधिकतर सॉफ्टवेयर बनाने वाले भी ऐप्प्स इन्ही के लिए बनाते हैं - आखिर रोटी का सवाल है!

 कुल मिलाकर हमने देखा है कि एक हद के बाद अधिक कोर या गति के प्रोसेसर से हमें कुछ ख़ास फायदा नहीं होता है । हाँ, हम डींग ज़रूर हाँक सकते हैं कि भई हमारे फ़ोन में इतने कोर का प्रोसेसर है जो पलक झपकते फलां काम कर सकता है, लेकिन अगर आप ध्यान से देखें तो इतनी गति आपको धीमे दिखने वाले प्रोसेसर से भी मिल सकती है । कहने का मतलब यह नहीं है कि तेज़ और कई कोर के युक्त प्रोसेसर के फायदे नहीं होते - लेकिन इनका लाभ उठाने के लिए सीमित सॉफ्टवेयर ही उपलब्ध हैं । क्वाड कोर प्रोसेसर युक्त फ़ोन का हाल आजकल वही है जो दिल्ली के यातायात में फँसी फेरारी कार का है  - वह दिखने और चलने में शानदार है, लेकिन उसे चलाने के लिए सड़क ही नहीं है ! पांच साल पहले आपको पता भी नहीं था कि आपके नोकिया फ़ोन में कौन सा प्रोसेसर है - अजी पहले आईफोन के प्रोसेसर की गति भी किसी को नहीं पता थी। लेकिन वो बढ़िया काम करते थे!

जब भी कोई निर्माता अपने उपकरण के प्रोसेसर का भजन जपते हुए आता है, हमें याद आते हैं विश्वप्रसिद्ध प्रोसेसर निर्माता इंटेल के ही माइकल बेल के शब्द: "मैं अपने कंप्यूटर में क्वाड कोर प्रोसेसर इस्तेमाल नहीं करता हूँ, तो फ़ोन में भला क्यों करूंगा?" सोचने की बात है, न?

Saturday, October 6, 2012

फ़ोन दिखाने की भी एक अदा होती है, प्यारे




एप्पल के स्टीव जोब्स को चाहे आप देवता समझें या दानव   एक बात को नकारा नहीं जा सकता - उनको उपकरण दिखाने की अदा बखूबी आती थी। उनको ज़रुरत कभी नहीं पड़ी फिल्म स्टारों की या किसी शोर शराबे की। बस फ़ोन ही उनका सबसे बड़ा हीरो था। और उनका आत्मविश्वास दर्शकों को भी यह यकीन दिला देता था कि वो एक मामूली उपकरण नहीं बल्कि कोई दैवीय चीज़ देख रहे हैं। काश हमारे भारतीय CEO भी कुछ ऐसा आलम जमा पाते - उनके पास शानदार उपकरण तो ज़रूर होते हैं लेकिन बड़ी हस्तियों से लैस लौन्चों के शोर शराबे में ये कई बार खो जाते हैं। इस सब शोर में बेचारे कंपनी वाले भी उपकरण को यूँ प्रदर्शित करते हैं जैसे कि यह उनकी मजबूरी है।  

अगर यकीन नहीं होता तो चित्र देखें और अपना अपना सबक सीखें - एक तरफ हैं  सितारे और कंपनी के उच्चतम अधिकारी और उनके साथ है एक उपकरण और औपचारिक मुस्कानें। 

दूसरी तरफ एक अकेला इंसान, एक उपकरण और उसका जुनून । 

आखिर फ़ोन दिखाने की भी एक अदा होती है, प्यारे