Friday, October 19, 2012

"एंड्रोएड मुफ्त है, लेकिन ओपन सोर्स नहीं!"



जी हाँ, आपने सही पढ़ा - एक डेवेलपर ने अपना नाम न बताये जाने की शर्त पर हमसे ये कहा है। यह बात हुई एक एप्प डेवेलपर फोरम में जहां इस डेवेलपर ने साफ़ तौर पर यह कह डाला की एंड्रोएड और एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS में मात्र इतना फर्क है कि iOS का उपयोग करने के लिए डेवेलपर को फीस देनी पड़ती है।  इस डेवेलपर के अनुसार किसी भी सॉफ्टवेयर को ओपन सोर्स कहलाने के लिए अपने विकास को पारदर्शी रखना चाहिए जो कि एंड्रोएड नहीं करता। "आप चाहे कितनी भी ओपन सोर्स की रट लगा लें, कोरा सच तो यह है कि एंड्रोएड पूरी तरह गूगल के कब्ज़े में है। हाँ, आप इसका इस्तेमाल बिना फीस लिए सॉफ्टवेयर बनाने और फ़ोन में लगाने के लिए कर सकते हैं। और आपका मन करे सो इसमें परिवर्तन भी कर सकते हैं, लेकिन अंत में एंड्रोएड का जो भी नया संस्करण आएगा, वो गूगल से ही आएगा, किसी डेवलपर समुदाय से नहीं," उस डेवेलपर ने कहा। 

उसके अनुसार लिनक्स सच्चे मामले में ओपन सोर्स है क्योंकि उसका विकास एक पारदर्शी तरह से एक समुदाय द्वारा होता है। "कई लोग लिनक्स के अपने अपने संस्करण निकाल चुके हैं, लेकिन ऐसा एंड्रोएड के साथ नहीं हुआ है, क्योंकि उसका नियंत्रण पूरी तरह गूगल के पास है। हमें अभी भी नहीं पता है कि एंड्रोएड के अगले संस्करण में क्या आएगा और उसकी क्या तकनीकी ज़रूरतें होंगी - यह सब तो गूगल ही जानता है। ऐसे सॉफ्टवेयर को आप ओपन सोर्स की उपाधि  कैसे प्रदान कर सकते हैं? ओपन सोर्स का मतलब होता है खुलापन, एक ऐसा माहौल जहां सबको एक सॉफ्टवेयर के बारे में सब पता है। लेकिन एंड्रोएड में ऐसा नहीं है," उसने कहा

हमें कहना पड़ेगा कि यह बात हमें बड़ी रोचक लगी, खासकर क्योंकि एंड्रोएड के कई समर्थक उसके ओपन सोर्स होने को उसकी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। लेकिन क्या एक सॉफ्टवेयर जिसका विकास पूरी तरह से एक ही कंपनी के हाथ में हो, सही मायने में ओपन सोर्स कहा जा सकता है? या समय आ गया है कि फ़ोन निर्माता और डेवेलपर  एंड्रोएड के अपने अपने संस्करण निकालें, जैसा कि कुछ हद तक अमेज़न ने अपनी किन्डल फायर टैबलेट के साथ किया है? यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हाँ, एक बात ज़रूर है, अगली बार जब जोई एंड्रोएड को ओपन सोर्स कहेगा, तो हम आँख मूंदकर उसके कथन को सत्य नहीं मान लेंगे

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