प्रोजेक्टर को लेकर सैमसंग गैलेक्सी बीम खास चर्चा में है। और होना भी
चाहिए क्योंकि इस फोन की यूएसपी इसकी प्रोजेक्टर तकनीकी है। जिसका इस्तेमाल
इनडोर और आउटडोर के लिए किया जा सकता है। इस प्रोजेक्टर फोस से न सिर्फ घर
में बल्कि बाहर भी तस्वीरों और वीडियो को प्रजेंटेशन के तौर पर देखा जा
सकता है। सैमसंग गैलेक्सी बीम एक खास बात यह भी है कि टॉप पैनल पर
प्रोजेक्टर लैंस के बावजूद भी फोन की मोटाई 12.5 एमएम है जो नोकिया प्योर
व्यू से कम ही है। यह एंडरायड 2.3 ओएस ;जिंजरब्रेड और 1 गीगाहर्ट्ज़ का
डुअल कोर प्रोसेसर पर काम करता है। इसके मल्टीमीडिया फीचर्स देंखे तो फ्लैश
सहित 5 मेगापिक्सल ऑटो फोकस कैमरा और 1.3 मेगापिक्सल सेकेंडरी कैमरे की
सुविधा दी गई है। 720पी एचडी वीडियो रिकॉर्डिंग कई सारे आडियो/वीडियो
फारर्मेंट को सपोर्ट करता है। इसके अलावा 768 एमबी रेम, 8जीबी इंटरनल
मैमोरी, 32 जीबी एक्पेंडेबल मैमोरी सपोर्ट है। कनेक्टिविटी के लिए 3.0+
एचएस ब्लूटूथ, वाईफाई, एचएसडीपीए व एचएसयूपीए सपोर्ट करता है। इसकी बैटरी
2000 एमएएच की है। 4.0 इंच स्क्रीन के इस फोन की कीमत 29,990 रुपए है।
Tuesday, August 7, 2012
Monday, July 30, 2012
गाड़ी बुला रही है...
खिलाड़ी कृपया ध्यान दें। अगर आप मोबाइल में एक ट्रेन गेम का इंतजार कर रहे थे तो यह इंतजार खत्म हो चुका है।
कुछ समय पहले गूगल प्ले पर ब्रेन एंड पजल श्रेणी में ट्रेक माय ट्रेन पजल गेम पेश किया गया है। अगर आपने व्हेअर इज माय वाटर या शूट द एप्पल पसंद किया तो निश्चित रूप से आपको ट्रेक माय ट्रेन दिलचस्प लगेगा। ट्रेन को समय के साथ सुरक्षित और सही स्थान पर पहुंचने की ज़िम्मेदारी आप पर है। इसको आप छह एपिसोड तक फ्री खेल सकते हैं। प्रत्येक एपिसोड में 12 लेवल हैं। सभी लेवल काफी अच्छे और दिलचस्प हैं। इसमें रेल को सही दिशा देने के लिए आपको सही रेल ट्रक को जोड़ना होगा। जैसे-जैसे आप खेल के साथ आगे बढ़ते जाएंगे। खेल और भी रोचक होता जाता है। अंतिम एपिसोड में मल्टी ट्रेन के साथ आपको ट्रैक पर नियंत्रण करना होगा। ट्रेन आपस में भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती हैं, इसलिए आपको ट्रेन की गति पर भी नियंत्रण रखना होगा। गति पर नियंत्रण करने के लिए स्क्रीन के बाईं ओर दिए गए प्ले बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रेन रोकने के लिए रेलवे ट्रेक पर लगे सिग्नल का भी उपयोग कर सकते हैं। ट्रेक माय ट्रेन एक पजल गेम है छोटे बच्चों को इसे खेलने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। लेकिन यही परेशानी आपको हल करने में जरूर अच्छी लगेगी। गेम के ग्राफिक्स बहुत अच्छे तो नहीं कहे जा सकते हैं लेकिन साउंड इफेक्ट जैसे कि रेलगाड़ी की आवाज काफी सही है। गेम लगभग सभी एंडरायड फोन को सपोर्ट करता है।
कुछ समय पहले गूगल प्ले पर ब्रेन एंड पजल श्रेणी में ट्रेक माय ट्रेन पजल गेम पेश किया गया है। अगर आपने व्हेअर इज माय वाटर या शूट द एप्पल पसंद किया तो निश्चित रूप से आपको ट्रेक माय ट्रेन दिलचस्प लगेगा। ट्रेन को समय के साथ सुरक्षित और सही स्थान पर पहुंचने की ज़िम्मेदारी आप पर है। इसको आप छह एपिसोड तक फ्री खेल सकते हैं। प्रत्येक एपिसोड में 12 लेवल हैं। सभी लेवल काफी अच्छे और दिलचस्प हैं। इसमें रेल को सही दिशा देने के लिए आपको सही रेल ट्रक को जोड़ना होगा। जैसे-जैसे आप खेल के साथ आगे बढ़ते जाएंगे। खेल और भी रोचक होता जाता है। अंतिम एपिसोड में मल्टी ट्रेन के साथ आपको ट्रैक पर नियंत्रण करना होगा। ट्रेन आपस में भी दुर्घटनाग्रस्त हो सकती हैं, इसलिए आपको ट्रेन की गति पर भी नियंत्रण रखना होगा। गति पर नियंत्रण करने के लिए स्क्रीन के बाईं ओर दिए गए प्ले बटन का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके अलावा ट्रेन रोकने के लिए रेलवे ट्रेक पर लगे सिग्नल का भी उपयोग कर सकते हैं। ट्रेक माय ट्रेन एक पजल गेम है छोटे बच्चों को इसे खेलने में थोड़ी परेशानी हो सकती है। लेकिन यही परेशानी आपको हल करने में जरूर अच्छी लगेगी। गेम के ग्राफिक्स बहुत अच्छे तो नहीं कहे जा सकते हैं लेकिन साउंड इफेक्ट जैसे कि रेलगाड़ी की आवाज काफी सही है। गेम लगभग सभी एंडरायड फोन को सपोर्ट करता है।
Monday, July 2, 2012
कैसी कैसी स्क्रीन
एमोलेडः एमोलेड का आशय है एक्टिव मैट्रिक्स ऑर्गैनिक लाइट-इमेटिंग
डायोट। इस तकनीक का उपयोग टीवी और मोबाइल डिसप्ले के लिए किया जाता है। आज
ज्यादातर स्मार्ट फोन के डिसप्ले में इसी तकनीक का उपयोग किया जा रहा है।
सर्वप्रथम इसका उपयोग सैमसंग के फोन में देखने को मिला था। आम स्क्रीन की
अपेक्षा इसमें चीजें 20 फीसदी तक ज्यादा स्पष्ट दिखाई देती हैं। इसके साथ
ही बैटरी खपत भी अन्य स्क्रीन की अपेक्षा कम है। इसका विकास खासकर टच आधरित
बड़े स्क्रीन वाले फोन के लिए किया गया है। आज सैमसंग, नोकिया, एलजी,
सोनी एरिक्सन और एचटीसी सहित कई कंपनियों द्वारा एमोलेड स्क्रीन का उपयोग
किया जा रहा है।
सुपर एमोलेडः एमोलेड तकनीक का यह उन्नत संस्करण है। इसका उपयोग खासतौर से मोबाइल फोन में देखने को मिलता है। भारत में सैमसंग गैलेक्सी एस पहली डिवायस है जिसमें सुपर एमोलेड डिसप्ले का उपयोग किया गया था। यह तकनीक एमोलेड से ज्यादा एडवांस है और धूप में भी चीजें स्पष्ट दिखाई देती हैं। साधारण स्क्रीन तकनीक से 30 फीसदी तक पावर खपत कम करने में सक्षम है। सुपर एमोलेड के बाद इसका एचडी संस्करण का उपयोग सैमसंग नोट में देखने को मिला है।
सुपर एमोलेड प्लसः जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह तकनीक एमोलेड और सुपर एमोलेड से ज्यादा एडवांस है। यह न सिर्फ बेहतर डिसप्ले में सक्षम है बल्कि सुपर एमोलेड की अपेक्षा 18 फीसदी तक बैटरी बचत करने में सक्षम है। वहीं सूर्य की रोशनी में भी चीजें बेहतर तरीके से देखी जा सकती हैं। सैमसंग गैलेक्सी एस टू में इसका उपयोग पहली बार देखा गया है।
रेटिना डिसप्लेः डिसप्ले की इस तकनीक का उपयोग खासतौर से एपल डिवायस में देखने को मिला है। सबसे पहले आईफोन 4 में इसका उपयोग किया गया था जिसमें 3.5 इंच का डिसप्ले है। इस तकनीक के तहत डिसप्ले में एक इंच में 326 पिक्सल का उपयोग होता है। कंपनी दावा करती है कि मनुष्य की आंख के रेटिना में किसी तस्वीर निर्माण में 326 पिक्सल का उपयोग होता है। इस वजह से यह साधारण डिवायस की अपेक्षा ज्यादा बेहतर तरीके से चीजों के प्रदर्शन में सक्षम है। इसके अलावा 80 डिग्री तक स्क्रीन के घुमाव की स्थिति में भी आप चीजों को बेहतर तरीके से देख सकते हैं।
आईपीएसः आईपीएस का आशय है इन प्लान स्विचिंग। कई कंपनियों द्वारा डिसप्ले के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। हिताची लिमिटेड द्वारा यह तकनीक विकसित की गई थी। यह खासतौर से बेहतर डिसप्ले और स्क्रीन घुमाव की स्थिति में भी चीजों के प्रदर्शन के लिए जाना जाता है।
नोवा डिसप्लेः नोवा डिसप्ले का उपयोग सबसे पहले एलजी आप्टिमस ब्लैक में देखने को मिला था। कंपनी दावा करती है कि यह साधरण डिसप्ले से 50 फीसदी तक बैटरी खपत कम करने में सक्षम है। इसकी बेहतर ब्राइटनेस क्षमता डिसप्ले को और भी शानदार बनाती है जिससे ब्राउजिंग क्षमता और डाक्यूमेंट इत्यादि पढ़ने में आपको आसानी हो। साथ ही सूर्य की तेज रोशनी में भी स्क्रीन पर चीजों का प्रदर्शन साफ और स्पष्ट होता है।
क्लिर ब्लैक डिसप्लेः हाल ही में डिसप्ले की यह तकनीक भी बेहद चर्चा में रही है। हाल में नोकिया लुमिया 800 और लुमिया 710 में इस तकनीक का उपयोग किया गया है। यह तकनीक स्क्रीन पर एक ब्लैक लेयर बनाती है जो बाहर से डिवायस पर पड़ रही किरणों के रिफ्रलेक्शन को रोकती है। जिससे स्क्रीन तेज धूप में भी बेहतर प्रदर्शन कर सके। वहीं ब्लैक लेयर सफेद की अपेक्षा बैटरी खपत को भी कम करता है।
गोरिल्ला ग्लासः गोरिल्ला ग्लास तकनीक को कोर्निंग कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। इसका प्रयोग खासतौर से पोर्टेबल इलेक्ट्रानिक डिवायस के लिए किया जाता है। यह स्क्रीन को मजबूती प्रदान करता है जिससे कि गिरने के दौरान टूटे-फूटे न।
ओलियोफोबिक कोटः इस तकनीक का उपयोग स्मार्ट टचस्क्रीन फोन में देखने को मिल रहा है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह एक प्रकार की कोटिंग है जो स्क्रीन पर की जाती है। इससे साधरण स्क्रीन के मुकाबले ओलियोफोबिक स्क्रीन थोड़ी सख्त हो जाती है जो स्क्रीन पर बाहरी प्रभाव से हो रहे नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद करता है। जैसे यह टूटने, रगड़ लगने और उंगलियों के निशान इत्यादि को रोकती है।
सुपर एमोलेडः एमोलेड तकनीक का यह उन्नत संस्करण है। इसका उपयोग खासतौर से मोबाइल फोन में देखने को मिलता है। भारत में सैमसंग गैलेक्सी एस पहली डिवायस है जिसमें सुपर एमोलेड डिसप्ले का उपयोग किया गया था। यह तकनीक एमोलेड से ज्यादा एडवांस है और धूप में भी चीजें स्पष्ट दिखाई देती हैं। साधारण स्क्रीन तकनीक से 30 फीसदी तक पावर खपत कम करने में सक्षम है। सुपर एमोलेड के बाद इसका एचडी संस्करण का उपयोग सैमसंग नोट में देखने को मिला है।
सुपर एमोलेड प्लसः जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह तकनीक एमोलेड और सुपर एमोलेड से ज्यादा एडवांस है। यह न सिर्फ बेहतर डिसप्ले में सक्षम है बल्कि सुपर एमोलेड की अपेक्षा 18 फीसदी तक बैटरी बचत करने में सक्षम है। वहीं सूर्य की रोशनी में भी चीजें बेहतर तरीके से देखी जा सकती हैं। सैमसंग गैलेक्सी एस टू में इसका उपयोग पहली बार देखा गया है।
रेटिना डिसप्लेः डिसप्ले की इस तकनीक का उपयोग खासतौर से एपल डिवायस में देखने को मिला है। सबसे पहले आईफोन 4 में इसका उपयोग किया गया था जिसमें 3.5 इंच का डिसप्ले है। इस तकनीक के तहत डिसप्ले में एक इंच में 326 पिक्सल का उपयोग होता है। कंपनी दावा करती है कि मनुष्य की आंख के रेटिना में किसी तस्वीर निर्माण में 326 पिक्सल का उपयोग होता है। इस वजह से यह साधारण डिवायस की अपेक्षा ज्यादा बेहतर तरीके से चीजों के प्रदर्शन में सक्षम है। इसके अलावा 80 डिग्री तक स्क्रीन के घुमाव की स्थिति में भी आप चीजों को बेहतर तरीके से देख सकते हैं।
आईपीएसः आईपीएस का आशय है इन प्लान स्विचिंग। कई कंपनियों द्वारा डिसप्ले के लिए इस तकनीक का उपयोग किया जा रहा है। हिताची लिमिटेड द्वारा यह तकनीक विकसित की गई थी। यह खासतौर से बेहतर डिसप्ले और स्क्रीन घुमाव की स्थिति में भी चीजों के प्रदर्शन के लिए जाना जाता है।
नोवा डिसप्लेः नोवा डिसप्ले का उपयोग सबसे पहले एलजी आप्टिमस ब्लैक में देखने को मिला था। कंपनी दावा करती है कि यह साधरण डिसप्ले से 50 फीसदी तक बैटरी खपत कम करने में सक्षम है। इसकी बेहतर ब्राइटनेस क्षमता डिसप्ले को और भी शानदार बनाती है जिससे ब्राउजिंग क्षमता और डाक्यूमेंट इत्यादि पढ़ने में आपको आसानी हो। साथ ही सूर्य की तेज रोशनी में भी स्क्रीन पर चीजों का प्रदर्शन साफ और स्पष्ट होता है।
क्लिर ब्लैक डिसप्लेः हाल ही में डिसप्ले की यह तकनीक भी बेहद चर्चा में रही है। हाल में नोकिया लुमिया 800 और लुमिया 710 में इस तकनीक का उपयोग किया गया है। यह तकनीक स्क्रीन पर एक ब्लैक लेयर बनाती है जो बाहर से डिवायस पर पड़ रही किरणों के रिफ्रलेक्शन को रोकती है। जिससे स्क्रीन तेज धूप में भी बेहतर प्रदर्शन कर सके। वहीं ब्लैक लेयर सफेद की अपेक्षा बैटरी खपत को भी कम करता है।
गोरिल्ला ग्लासः गोरिल्ला ग्लास तकनीक को कोर्निंग कंपनी द्वारा तैयार किया गया है। इसका प्रयोग खासतौर से पोर्टेबल इलेक्ट्रानिक डिवायस के लिए किया जाता है। यह स्क्रीन को मजबूती प्रदान करता है जिससे कि गिरने के दौरान टूटे-फूटे न।
ओलियोफोबिक कोटः इस तकनीक का उपयोग स्मार्ट टचस्क्रीन फोन में देखने को मिल रहा है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है यह एक प्रकार की कोटिंग है जो स्क्रीन पर की जाती है। इससे साधरण स्क्रीन के मुकाबले ओलियोफोबिक स्क्रीन थोड़ी सख्त हो जाती है जो स्क्रीन पर बाहरी प्रभाव से हो रहे नुकसान को काफी हद तक कम करने में मदद करता है। जैसे यह टूटने, रगड़ लगने और उंगलियों के निशान इत्यादि को रोकती है।
Tuesday, June 19, 2012
नोकिया प्योरव्यू ने बहाई ज़ूम की उल्टी गंगा
हम पिछले कुछ दिनों से नोकिया का नया प्योरव्यू फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। और एक बात हमें समझ में आ गयी है - यह फोन उन प्राणियों के लिए है जो फोटो खींचने के बाद उसके साथ खींच-तान करते हैं। नहीं, हम यह नहीं कह रहे की इसका इकतालीस मेगापिक्सेल का भारी भरकम कैमरा बेकार है - वह तो वाकई में शानदार तसवीरें खींचता है। लेकिन अगर आप इसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको ज़ूम का दीवाना होना पड़ेगा। बाकी कैमरों में आपने ध्यान दिया होगा कि आप चित्र खींचने से पहले ज़ूम करते हैं। प्योरव्यू में कुछ उल्टी गंगा बहती है - यहाँ फायदा चित्र खींचने के बाद ज़ूम करने में है। और वह इसलिए क्योंकि प्योरव्यू की शानदार लेंस इतने सारे तत्त्व साफ़-साफ़ उभार के लाती है कि हमें तो लगता है कि इस फ़ोन से इंसान को फोटो पहले खींचनी चाहिए और तब बैठ कर तय करना चाहिए कि फोटो में क्या रखा जाए, और क्या दफा कर दिया जाए। ऐसा कम से कम एक दर्जन बार हुआ है कि हमने फोटो ली किसी की है लेकिन बाद में देखे पर हमें उसमे कुछ और ही पसंद आया है - और धन्य है प्योरव्यू का सेंसर जिसके कारण हम उसी को फोटो में उभार के ला पाए हैं।
तो अगर आपके पास प्योरव्यू है तो हमारी मानिये और दनादन फोटो खींचिए। अरे, सेंसर इतना सारी चीज़ें आपको चित्रों में दिखायेगा कि आपको कुछ न कुछ पसंद ज़रूर ही आ जाएगा, चाहे आपको चित्र का मुख्य विषय पसंद आये या नहीं!
नोकिया प्योरव्यू ने बहाई ज़ूम की उल्टी गंगा
हम पिछले कुछ दिनों से नोकिया का नया प्योरव्यू फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। और एक बात हमें समझ में आ गयी है - यह फोन उन प्राणियों के लिए है जो फोटो खींचने के बाद उसके साथ खींच-तान करते हैं। नहीं, हम यह नहीं कह रहे की इसका इकतालीस मेगापिक्सेल का भारी भरकम कैमरा बेकार है - वह तो वाकई में शानदार तसवीरें खींचता है। लेकिन अगर आप इसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको ज़ूम का दीवाना होना पड़ेगा। बाकी कैमरों में आपने ध्यान दिया होगा कि आप चित्र खींचने से पहले ज़ूम करते हैं। प्योरव्यू में कुछ उल्टी गंगा बहती है - यहाँ फायदा चित्र खींचने के बाद ज़ूम करने में है। और वह इसलिए क्योंकि प्योरव्यू की शानदार लेंस इतने सारे तत्त्व साफ़-साफ़ उभार के लाती है कि हमें तो लगता है कि इस फ़ोन से इंसान को फोटो पहले खींचनी चाहिए और तब बैठ कर तय करना चाहिए कि फोटो में क्या रखा जाए, और क्या दफा कर दिया जाए। ऐसा कम से कम एक दर्जन बार हुआ है कि हमने फोटो ली किसी की है लेकिन बाद में देखे पर हमें उसमे कुछ और ही पसंद आया है - और धन्य है प्योरव्यू का सेंसर जिसके कारण हम उसी को फोटो में उभार के ला पाए हैं।
तो अगर आपके पास प्योरव्यू है तो हमारी मानिये और दनादन फोटो खींचिए। अरे, सेंसर इतना सारी चीज़ें आपको चित्रों में दिखायेगा कि आपको कुछ न कुछ पसंद ज़रूर ही आ जाएगा, चाहे आपको चित्र का मुख्य विषय पसंद आये या नहीं!
Wednesday, June 13, 2012
नोकिया प्योर व्यू, स्मार्ट फीचर या स्मार्ट कैमरा
आज भारतीय बाजार में लांच होने वाले लगभग हर फोन को स्मार्ट फोन बताकर लांच किया जा रहा है। चाहे वो कम बजट का हो या ज्यादा। कोई आपरेटिंग सिस्टम एंडरायड 4.0 की विशेषता बता रहा है तो कोई ब्लैकबेरी ओएस 7.1 की बढ़ाई करते नहीं थक रहा है। लेकिन नोकिया है, जो अपना अलग ही सूर अलाप रहा है। कंपनी 33,899 रुपए में प्योर व्यू 808 स्मार्ट फोन लांच कर रही है लेकिन स्मार्ट फीचर और आपरेटिंग के बारे में बात ही नहीं कर रही। अगर कहीं से भी कोई भी आवाज आई है तो सिर्फ कैमरे के बारे में ही बोला गया है। 41 मेगापिक्सल कैमरा सेंसर और स्मार्ट फोटोग्रापफी। इसमें कोई दो राय नहीं है कि 41 एमपी कैमरा सेंसर इस फोन की यूएसपी है लेकिन इसमें अच्छे स्मार्ट फीचर भी हैं। फोन सिंबियन के नवीन आपरेटिंग सिस्टम बैले पर पेश किया गया है और हर तरह के स्मार्ट फीचर से लैस है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजमी है कि स्मार्ट फोन के इस दौर में सिर्फ मल्टीमीडिया का बात करना कितना सार्थक है?
आपको आज भी नोकिया का कम्यूनिकेटर, एनगेज और एन95 फोन याद होंगे। कंपनी द्वारा लांच किए गए इन फोन ने मोबाइल जगत में ट्रेंड सेटर के रूप में कार्य किया और नोकिया को नई उंचाइयों तक ले जाने में कामयाब रहीं। फीचर फोन के उस दौर में मल्टीमीडिया को हथियार बनाकर कंपनी नंबर एक बनने में कामयाब रही। वहीं आज पफर से कंपनी ने उसी ट्रेंड को अपनाया है।
स्मार्ट फोन के इस दौर में नोकिया का यह नया फंडा कितना कामयाब होगा यह तो आने वाला समय ही बताएगा लेकिन इतना तो जरूर कहा जा सकता है कि प्योर व्यूह के इस कैंपेन को भी हल्के में नहीं लिया जा सकता।
Wednesday, June 6, 2012
सैमसंग गैलेक्सी एस ३ - इंसानों का फ़ोन, दैवीय दाम
हम कई दिनों से फ़ोन देखते आ रहे हैं, लेकिन हमें यह मानना पड़ेगा कि हमने कभी भी किसी एक फ़ोन के इतने दाम बदलते नहीं देखे हैं जितने सैमसंग के गैलेक्सी एस ३ के (इसके बारे में हमारे लेखक, मुकेश जी, ने हाल ही में टिपण्णी की थी) । बस पिछले ही हफ़्ते सैमसंग ने इसका दाम Rs 43,190 बता कर कई लोगों को चौंका दिया था. खैर, हमें उसी वक़्त कई "जानकारों" ने आश्वस्त किया था कि फ़ोन का दाम बाज़ार में इससे काफी कम होगा।
वे सत्य बोल रहे थे।
लेकिन कितना सत्य, इसका अनुमान तो हम सपनों में भी नहीं लगा सकते थे। क्योंकि फ़ोन के लॉन्च होने के मात्र एक हफ़्ते के अन्दर हमें यह अलग अलग दुकानों में अलग अलग दामों पर मिल रहा है। ख़ुशी की बात यह है कि इनमे से कोई भी औपचारिक दामों के आस पास भी नहीं हैं। विस्मय की बात यह है कि इनमे से कोई एक-दुसरे के आस पास भी नहीं हैं। कोई फ़ोन को चालीस हज़ार रुपयों में बेंच रहा था, तो कोई सैंतीस हज़ार में, और हद तो तब हो गई जब वेबसाइट सुलेखा.कॉम ने इसे पैंतीस हज़ार रुपयों से भी कम दाम पर बेंचने की सूचना दी। कहते हैं कि सैमसंग के खुद ऐतराज़ जताने पर वेबसाइट ने इस दाम को बाद में अड़तीस हज़ार के आस-पास कर दिया, लेकिन इस सब से एक बात जग-ज़ाहिर हो गयी - सैमसंग गैलेक्सी एस ३ के असली दाम को शायद कोई नहीं जानता। इसका औपचारिक दाम है Rs 43,190 और यह आपको दुकानों और वेबसाइटों में उससे तीन से छह हज़ार रुपयों कम में मिल रहा है।
हमें तो अचरज है कि ऐसे फ़ोन का औपचारिक दाम रखा ही क्यों गया, जब उसका इस्तेमाल कोई नहीं कर रहा है।
सैमसंग ने कहा था कि सैमसंग गैलेक्सी एस ३ प्रकृति से प्रेरित था और इंसानों के लिए बना था. इसका दाम हमें लेकिन भगवान से प्रेरित लग रहा है - ऊपरवाले की तरह उसके भी कई रूप नज़र आ रहे हैं. हाँ, दुःख इस बात का है कि इसका दाम इंसानों को ही चुकाना पड़ेगा।
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