हम पिछले कुछ दिनों से नोकिया का नया प्योरव्यू फोन इस्तेमाल कर रहे हैं। और एक बात हमें समझ में आ गयी है - यह फोन उन प्राणियों के लिए है जो फोटो खींचने के बाद उसके साथ खींच-तान करते हैं। नहीं, हम यह नहीं कह रहे की इसका इकतालीस मेगापिक्सेल का भारी भरकम कैमरा बेकार है - वह तो वाकई में शानदार तसवीरें खींचता है। लेकिन अगर आप इसका पूरा फायदा उठाना चाहते हैं तो आपको ज़ूम का दीवाना होना पड़ेगा। बाकी कैमरों में आपने ध्यान दिया होगा कि आप चित्र खींचने से पहले ज़ूम करते हैं। प्योरव्यू में कुछ उल्टी गंगा बहती है - यहाँ फायदा चित्र खींचने के बाद ज़ूम करने में है। और वह इसलिए क्योंकि प्योरव्यू की शानदार लेंस इतने सारे तत्त्व साफ़-साफ़ उभार के लाती है कि हमें तो लगता है कि इस फ़ोन से इंसान को फोटो पहले खींचनी चाहिए और तब बैठ कर तय करना चाहिए कि फोटो में क्या रखा जाए, और क्या दफा कर दिया जाए। ऐसा कम से कम एक दर्जन बार हुआ है कि हमने फोटो ली किसी की है लेकिन बाद में देखे पर हमें उसमे कुछ और ही पसंद आया है - और धन्य है प्योरव्यू का सेंसर जिसके कारण हम उसी को फोटो में उभार के ला पाए हैं।
तो अगर आपके पास प्योरव्यू है तो हमारी मानिये और दनादन फोटो खींचिए। अरे, सेंसर इतना सारी चीज़ें आपको चित्रों में दिखायेगा कि आपको कुछ न कुछ पसंद ज़रूर ही आ जाएगा, चाहे आपको चित्र का मुख्य विषय पसंद आये या नहीं!

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