Monday, November 19, 2012

आईफोन 5 विश्लेषण - "जब तक है जान" के अंदाज़ में!



तेरे शीशे और अलमूनियम के नज़ारे को
तेरे हीरे से चमकते शेम्फर के तारे को
निहारता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

तेरे धमाकेदार कैमरे के चित्रों से
और उसपर लगे सफायर के शीशे से 
 चमत्कृत होता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

तेरे रोशन रेटीना डिस्प्ले पर
उसपर दिखते वेब, विडियो और गेमप्ले पर
फिदा होता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

एंड्राइड  के उपासकों की कोरी डींगों  पर
उनके क्वाड कोर फ़ोनों के क्वाड्रांट के स्कोरों  पर
मुस्कुराता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

तेरे प्लास्टिक से बने प्रतिद्वंद्वियों की
चौड़े फ़ोन घुमाते बन्दे और बंदियों की
खिल्ली उड़ाता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

तेरे ऐप्स और गेम्स के साज़ से
और सिरी की एक्सेंट-लदी आवाज़ से
ज़िन्दगी के टेक सुर सजाता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

तुझे देर से देश में लाने वालों को
तेरे गगनचुम्बी दामों को
कोसता रहूँगा मैं
जब तक है जान
जब तक है जान

Tuesday, October 23, 2012

एप्पल ने लांच किया आईपैड मिनी



एप्ल आईपैड के मिनी संस्करण को लेकर पिछले कई माह से चर्चा जारी थी। कयास लगाए जार रहे थे कि कंपनी आईफोन 5 के साथ ही इसे पेश करेगी लेकिन ऐसा नहीं हुआ 

23 अक्टूबर को अंततः एप्पल ने आईपैड के मिनी संस्करण आईपैड मिनी को लांच कर ही दिया। डिवायस में 7.9 इंच की स्क्रीन है। पुराने आईपैड की तरह यह भी वाई-फाई और वाई-फाई+एलटीई संस्करण पर आधारित है।

साथ ही 16/32/64 जीबी मैमोरी के साथ उपलब्ध् है। यह एपल के नवीन आपरेटिंग आईओएस 6 पर है और इसमें 1 गीगाहट्र्ज का डुअल कोर ए9 प्रोसेसर दिया गया है। डिवायस में 5 मेगापिक्सल कैमरा आटोफोकर फीचर के साथ है। 

हालांकि फिलहाल यह भारतीय बाजार में उपलब्ध् नहीं है लेकिन कुछ ही दिनो में उपलब्ध् होने की उम्मीद है। जहां तक कीमत की बात है तो एपल आईपैड मिनी वाई-फाई संस्करण की कीमत 17,000 रुपए के आस-पास होने ने की उम्मीद है। वहीं वाई-फाई+एलटीई की कीमत 30,000 रुपए तक हो सकती है। 

Saturday, October 20, 2012

'एल जी' को वीयू से आस

एल जी सोमवार को आप्टिमस वीयू को लांच करने वाले हैं। पांच इंच का यह डिवायस पिछले कई माह से सुर्खियों में था। अब कुछ ही दिनों में फैबलेट कैटेगरी का यह डिवायस भारत में उपलब्ध् होगा। परंतु एल जी का इस समय व्यू को भारत में लाना थोड़ नहीं बल्कि काफी देर कहा जाएगा। क्योंकि इससे पहले ही 'सैमसंग जी' आपना फैबलेट कैटेगरी में दो गैलेक्सी नोट और गैलेक्सी नोट 2 डिवायस पेश कर चुके हैं और उपभोक्ताओं द्वारा उसे बेहद सराहा भी गया है। ऐसे में 'एल जी' के लिए राह आसन नहीं होगी। मजबूत स्थिति में खड़े 'सैमसंग जी' को आकर किसी भी कैटेगरी में टक्कर देना।
हालांकि कंपनी को इससे बेहद आस है क्योंकि यह कंपनी द्वारा पेश किया जाने वाला यह फैबलेट फोन है और कई खासियतों से लैस है। परंतु सवाल यह है कि क्या आप्टिमस वीयू का वार गैलेक्सी नोट के एस-पेन की यह निभ तोड़ पाएगा।

Friday, October 19, 2012

"एंड्रोएड मुफ्त है, लेकिन ओपन सोर्स नहीं!"



जी हाँ, आपने सही पढ़ा - एक डेवेलपर ने अपना नाम न बताये जाने की शर्त पर हमसे ये कहा है। यह बात हुई एक एप्प डेवेलपर फोरम में जहां इस डेवेलपर ने साफ़ तौर पर यह कह डाला की एंड्रोएड और एप्पल के ऑपरेटिंग सिस्टम iOS में मात्र इतना फर्क है कि iOS का उपयोग करने के लिए डेवेलपर को फीस देनी पड़ती है।  इस डेवेलपर के अनुसार किसी भी सॉफ्टवेयर को ओपन सोर्स कहलाने के लिए अपने विकास को पारदर्शी रखना चाहिए जो कि एंड्रोएड नहीं करता। "आप चाहे कितनी भी ओपन सोर्स की रट लगा लें, कोरा सच तो यह है कि एंड्रोएड पूरी तरह गूगल के कब्ज़े में है। हाँ, आप इसका इस्तेमाल बिना फीस लिए सॉफ्टवेयर बनाने और फ़ोन में लगाने के लिए कर सकते हैं। और आपका मन करे सो इसमें परिवर्तन भी कर सकते हैं, लेकिन अंत में एंड्रोएड का जो भी नया संस्करण आएगा, वो गूगल से ही आएगा, किसी डेवलपर समुदाय से नहीं," उस डेवेलपर ने कहा। 

उसके अनुसार लिनक्स सच्चे मामले में ओपन सोर्स है क्योंकि उसका विकास एक पारदर्शी तरह से एक समुदाय द्वारा होता है। "कई लोग लिनक्स के अपने अपने संस्करण निकाल चुके हैं, लेकिन ऐसा एंड्रोएड के साथ नहीं हुआ है, क्योंकि उसका नियंत्रण पूरी तरह गूगल के पास है। हमें अभी भी नहीं पता है कि एंड्रोएड के अगले संस्करण में क्या आएगा और उसकी क्या तकनीकी ज़रूरतें होंगी - यह सब तो गूगल ही जानता है। ऐसे सॉफ्टवेयर को आप ओपन सोर्स की उपाधि  कैसे प्रदान कर सकते हैं? ओपन सोर्स का मतलब होता है खुलापन, एक ऐसा माहौल जहां सबको एक सॉफ्टवेयर के बारे में सब पता है। लेकिन एंड्रोएड में ऐसा नहीं है," उसने कहा

हमें कहना पड़ेगा कि यह बात हमें बड़ी रोचक लगी, खासकर क्योंकि एंड्रोएड के कई समर्थक उसके ओपन सोर्स होने को उसकी सबसे बड़ी शक्ति मानते हैं। लेकिन क्या एक सॉफ्टवेयर जिसका विकास पूरी तरह से एक ही कंपनी के हाथ में हो, सही मायने में ओपन सोर्स कहा जा सकता है? या समय आ गया है कि फ़ोन निर्माता और डेवेलपर  एंड्रोएड के अपने अपने संस्करण निकालें, जैसा कि कुछ हद तक अमेज़न ने अपनी किन्डल फायर टैबलेट के साथ किया है? यह तो आने वाला समय ही बताएगा। हाँ, एक बात ज़रूर है, अगली बार जब जोई एंड्रोएड को ओपन सोर्स कहेगा, तो हम आँख मूंदकर उसके कथन को सत्य नहीं मान लेंगे

Tuesday, October 16, 2012

मीटिंग में डिस्टर्ब नहीं करेंगे टेलीकॉलर

मिस्टर नंबर टैक्स्ट, कॉल  एंड ब्लाक (Mr. Number Text, Call & Block)
ऐसा कम ही होता है कि आप फोन में एक एप्लिकेशन डाउनलोड करें और उस एप्लिकेशन का इस्तेमाल आप कई काम में कर सकें। अगर आप ऐसी एप्लिकेशन अपने फोन के लिए चाहते हैं तो गूगल प्ले पर मिस्टर नंबर के नाम से एप्लिकेशन मौजूद है। जिसके द्वारा आप अपने दोस्तों को फ्री मैसेज कर सकते हैं। अलग-अलग नंबर से एमएमएस के रूप में आने वाली पिक्चर्स को एक ही स्थान सुरक्षित कर सकते हैं, कॉल व मैसेज की सारी हिस्ट्री एक ही जगह पर देख सकते हैं। और सबसे खास बात कि आप इस एप्लिकेशन की मदद से अन वॉन्डेड कॉल से भी छुटकारा पा सकते हैं। सरकार की कोशिशों के बावजूद टेलीकॉलर कंपनियां कॉल  करने से बाज नहीं आती हैं। हर दिन मैसेज और कॉल करके आपको परेशान किया जाता है। मिस्टर नंबर अब आपको इस परेशानी से निजात दिलाएगा। किसी भी अनजान नंबर से आने वाली कॉल या मैसेज को आप ब्लॉक कर सकते हैं। कॉल ब्लॉक करने के लिए वैसे तो कई सारी एप्लिकेशन आपको मिल जाएंगी लेकिन मिस्टर नंबर जैसी वन इन ऑल एप्लिकेशन जैसे फीचर्स होना मुश्किल है। अगर आप चाहते हैं कि आपके नंबर पर कोई भी स्पैम कॉल न आए तो ऐसी कॉल  को असानी के साथ ब्लॉक किया जा सकता है। यहां कॉल को ब्लॉक करने के अलावा आप वाइस मेल का भी विकल्प मिलता है। जिसको आप सेटिंग में जाकर एडिट कर सकते हैं। गूगल प्ले से आप मिस्टर नंबर टैक्स्ट, कॉल  एंड ब्लॉक को फ्री https://play.google.com/store/apps/details?id=com.mrnumber.blocker&feature=search_result#?t=W251bGwsMSwxLDEsImNvbS5tcm51bWJlci5ibG9ja2VyIl0. डाउनलोड कर सकते हैं। यहां आपको मैसेजिंग के लिए कोई अलग से पैसे चुकने की कोई जरूरत नहीं है लेकिन डाटा चार्ज देना पड़ते हैं। फ्री मैसेजिंग और कॉल ब्लॉक करने के खास फीचर्स एप्लिकेशन को शानदार बनाते हैं।  

विंडोज फोन 8 में एचटीसी का दाव



विंडोज फोन को लेकर हलचल तेज है। नए अहसास के साथ लांच होने वाले इन फोन का प्रदर्शन पहले ही किया जा चुका है। पहले सैमसंग ने उसके बाद नोकिया और फिर विंडोज का पुराना साथी एचटीसी इस दौड़ में शामिल है। यह भागमभाग तो सिर्फ फ़ोन प्रदर्शन के लिए थी, असली मज़ा तो अब आयेगा क्यूंकि अब बारी है इनके लांच की।

प्रदर्शन में तो सैमसंग बाजी मार गया और इसका अंत एचटीसी से हुआ लेकिन लांच के इस दौड़ में बाजी उलटी दिखाई दे रही है। इस बार सैमसंग और नोकिया को पीछे छोड़ एचटीसी बाजी मारने की तैयारी में है। 2 नंवबर को नोकिया ने विंडोज फोन8  लुमिया 920 को पेश करने की तैयारी की  है और माइक्रोसॉफ्ट ने विंडोज़ फोन आपरेटिंग 29 अक्टूबर को लांच होना है।इससे पहले ही एचटीसी विंडोज फोन 8एक्स या 8एस में से किसी एक को लांच करने का मन बना चुका है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार एचटीसी इसी सप्ताह अपना विंडोज फोन पेश कर सकता है। फोन के नाम के बारे फिलहाल अभी कोई अता-पता नहीं है लेकिन यह तय है कि फ़ोन के स्पेसिफीकेशन में कोई बदलावा नहीं होगा और इसकी कीमत 30,000 रुपए से ज्यादा होने की उम्मीद है।

ऐसा  पहली बार नहीं है, एचटीसी ने विंडोज आपरेटिंग 7.5 पर रडार को भारत में सबसे पहले पेश किया था। हां, इसका लाभ कंपनी को कितना मिला था यह बताना थोड़ा मुश्किल है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि उस वक्त विंडोज मैंगो आपरेटिंग इतना लोकप्रिय नहीं था जितना कि आज। ऐसे में सबसे पहले लांच करने का लाभ कंपनी को मिल सकता है।

Sunday, October 14, 2012

कब खाएंगें जेली बीन?

लगभग तीन महीन पहले ही एंडरायड के नवीन आपरेटिंग सिस्टम 4.1 जेली बीन (Android Operating System 4.1 jelly bean) को अधिकारिक तौर लौंच  किया जा चुका है। बावजूद इसके आज बहुत कम ही फोन में इस आपरेटिंग पर देखने को मिल पायें हैं। भारत में फिलहाल सिर्फ कार्बन टैबलेट और सैमसंग गैलेक्सी नोट 2 (Samsung Galaxy Note2 N7100) एंडरायड आपरेटिंग सिस्टम 4.1 का इस्तेमाल कर रहे हैं। हालांकि गूगल ने अपने टैबलेट नेक्सस7 के लिए भी इसकी घोषणा कर दी है लेकिन अभी यह भारत में मौजूद नहीं है।

ऐसे में दिमागी घोड़े दौड़ने पर मजबूर हो जाते हैं कि आखिर ऐसा क्या है जो अब तक जेली बीन आपरेटिंग सिस्टम के प्रति मोबाइल निर्माता कोई खास तवज्जु नहीं दिखा रहे हैं। तीन महीने का वक्त कम नहीं होता। गैलेक्सी नोट 2 को छोड़ दें तो इन तीन महीनों में कई फोंस लांच किये जा चुके हैं लेकिन सभी डिवायस एंडरायड ओएस  4.0 आइसक्रीम सैंडविच या 2.3 जिंजर ब्रेड पर ही देखने को मिले हैं।

इस बारे में मोबाइल जगत के एक महानुभव कहते हैं एंडरायड आपरेटिंग सिस्टम 4.1 जेली बिन के साथ अभी कुछ समस्याएं हैं। इस वजह से फोन में बड़े पैमाने पर इसका उपयोग नहीं किया जा रहा है। हालांकि यह बात किस आधार पर कही गई यह बताने में वे जरा कतरा रहे थे लेकिन फिलहाल जेली बीन ओएस के प्रति मोबाइल निर्माताओं की अरुचि इस बात को सत्य की साबित करती है।

ऐसे में गूगल जी से हमारा नम्र निवेदन यह है कि सर जी, जींजर ब्रेड के नास्ते से उपभोक्ता उब चुके हैं और तीनो पहर आइसक्रीम सैंडविच ही खा रहे हैं। थोड़ा स्वाद में अब बदलाव किजिए। अगर जेली बीन के साथ समस्याएं हैं तो जल्द दूर किजिए। क्योंकि अब तक दूर से उसे देखकर ही संतोष करना पड़ रहा है। जरा उपभोक्ता को जेली बीन का भी स्वाद चखने दें। नहीं तो इस देरी के चक्कर में यदि माइक्रोसोफ्ट की आठवीं खड़की (विंडोज फोन 8) खुल जाएगी तो उपभोक्ता उसमे प्रवेश कर जायेंगे फिर लोगों जेली बीन को भूल जाएंगे।