Monday, May 21, 2012

3जी के बाद 4जी

आपसे अगर यह पूछा जाए कि हाल ही आई हालीवूड फिल्म एवेंजर में सबसे शक्तिशाली कैरेक्टर कौन है,  तो आप थोड़े असमंजस में पड़ जाएंगे। कौन ज्यादा ताकतवर है इस पर फैसला करना बेहद मुश्किल है। हर कैरेक्टर की अपनी एक अद्वितीय शक्ति है जो इस खासियत की वजह से मशहूर है। ऐसे में किसी एक का चुनाव करना टेढ़ी खीर है। आज भारतीय मोबाइल जगत के लिए भी स्थितियां कुछ ऐसी ही हो गई हैं जहां उन्हें आइअर्न मैन और हलक  के समान दो बेहतर तकनीक में से किसी एक का चुनाव करना है और ये तकनीक हैं एलटीई (लान्ग टर्म इवाल्यूशन) और वाईमैक्स।

3जी तकनीकी से अब तक आप रू-ब-रू हो चुके हैं। वीडियो कालिंग, बगैर बफरिंग के वीडियो स्ट्रीमिंग और तेज डाउनलोडिंग इससे संभव हो सकी। लेकिन इस सबके बावजूद मैं इतना कहूंगा कि यह तकनीक का अंत नहीं है बल्कि यह तो शुरुआत है। 3जी के माध्यम से फिलहाल 3.7, 7.2, 14 या अधिकतम 21 एमबीपीएस तक की गति से मोबाइल पर इंटरनेट चलाया जा सकता है। लेकिन एलटीई और वाईमैक्स में यह क्षमता कई गुणा ज्यादा है। इन तकनीक से मोबाइल पर 100 एमबीपीएस या उससे भी ज्यादा गति से डाटा प्राप्त की जा सकती है।

चलें 4जी की ओर
3जी सेवा के लांच के साथ ही 4जी सेवा की तैयारियां शुरू हो चुकी है। हाल ही में एयरटेल ने 4 जी की  कोलकत्ता और  बंगलुरु  सर्किल में शुरुवात कर दी है. फिलहाल अभी इस सेवा का इस्तेमाल डाटा के लिए ही किया जा रहा है.  4जी सेवा  के तहत एलटीई और वाई मैक्स दो तरह की सेवाएं आती हैं। ऐसे में भारत सहित पूरे विश्व में इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति है कि कौन सी तकनीक बेहतर है और किसे लागू किया जाए।  क्षमता के मामले में न तो एलटीई कम है और न ही वाईमैक्स। इस बहस पर आगे बढ़ने से पहले जरा एक नजर दोनों तकनीक पर डाल लें।
 

वाईमैक्स
वाईमैक्स वायरलेस ब्राडबैंड एक्सेस तकनीक है। यह वाई-पफाई तकनीक 802.11 के समान ही है। वाईमैक्स का आशय है ‘वर्ल्ड वाइड इंट्रोपरेबिलिटी फार माइक्रोवेब एक्सेस’। यह एक वायरलेस कम्युनिकेशन माध्यम है जो आईईईई 802.16 नेटवर्क आधारित है। इस तकनीक के विकास में नोकिया, एटीएंडटी और वेरीजोन सरीखी कंपनियों का बेहद योगदान है। 1990 के दशक में इन्होंने इसके विकास की नींव रखी। ये कंपनियां ऐसी तकनीक निर्मित करना चाहती थीं जिसकी नेटवर्क और डाटा क्षमता वर्तमान नेटवर्क से कई गुणा ज्यादा हो। इस कोशिश के तहत इंटल कापोरेशन ने वाई-फाई की उन्नत तकनीक वाईमैक्स का विकास किया। वर्ष 2002 में सर्वप्रथम यह तकनीक अस्तित्व में आई। वाईमैक्स सेवा वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने के लिए वाईमैक्स फोरम का गठन किया गया। जो इसके विकास के लिए कार्य कर रहा है।  

वाईमैक्स वाई-फाई की ही एक उन्नत तकनीक है। वाई-फाई के माध्यम से जहां 30 से 100 मीटर तक के क्षेत्र में बिना किसी केबल नेटवर्क का लाभ ले सकते हैं, वहीं वाईमैक्स में नेटवर्क क्षेत्र कई गुणा बढ़ जाता है। ब्राडबैंड वायरलेस एक्सेस ;बीडब्ल्यूए के तहत एक फिक्स्ड स्टेशन से 50 किलोमीटर के क्षेत्र तक नेटवर्क जोन तैयार किया जा सकता है। जबकि एक मोबाइल स्टेशन से 10 से 15 किलोमीटर क्षेत्र तक नेटवर्क जोन तैयार किया जा सकता है। वहीं यह तकनीक इंटरनेट और सेल्यूलर दोनों नेटवर्क पर कार्य करती है इसलिए मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटाप को भी वाईमैक्स से जोड़ा जा सकता है। हालांकि वाईमैक्स का लाभ लेने के लिए आवश्यक है कि डिवायस भी वाईमैक्स इनेबल हो। 

एलटीई
एलटीई का आशय है लान्ग टर्म इवाल्यूशन। यह मोबाइल नेटवर्क की नई तकनीक है। यह एक वायरलेस ब्राडबैंड तकनीक है जो मोबाइल नेटवर्क पर कार्य करती है। जीएसएम/ऐज और यूएमटीएस/एचएसएक्सपीए नेटवर्क पर आधारित  तकनीक बेहतर डाटा क्षमता के लिए जानी जाती है। एलटीई सेवा के लिए 1.25  मेगाहर्ट्ज से लेकर 20 मेगाहर्ट्ज बैंडविथ ;स्पैक्ट्रम तक का उपयोग किया जा सकता है। भारत में एलटीई को 2.3 गीगाहर्ट्ज टीडीडी स्पैक्ट्रम पर लांच करने की तैयारी की जा रही है। इस तकनीक के माध्यम से 50 मेगा बिट्स प्रति सेकेंड की दर से अपलिंकिंग और 100 मेगा बिट्स प्रति सेकेंड की दर से डाउनलिंकिंग गति पाई जा सकती है।
एलटीई तकनीक को 3जीपीपी ;थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट को विश्व की प्रमुख टेलीकाम संस्थाओं  इंटरनेशनल मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन द्वारा मानक तय किया गया है जिससे कि वैश्विक स्तर पर जीएसएम सेवा के माध्यम से यह तकनीक मुहैया कराई जा सके। एलटीई नेटवर्क को पहली बार जब लांच किया गया तो वह 3.9जी आधरित थी जो 4जी क्षमता के मानकों की बराबरी करने में सक्षम नहीं थी। लेकिन यह 4जी या नवीन एलटीई की ओर पहला कदम था। कुछ समय पश्चात नवीन एलटीई को और बेहतर क्षमता के साथ लांच किया गया जो बेहतर गति से डाटा हस्तांतरण करने में सक्षम है।


एलटीई या वाईमैक्स
जहां तक डाटा क्षमता की बात आती है तो फिलहाल एलटीई आगे है। एलटीई के माध्यम से 100 एमबीपीएस की इंटरनेट गति पाई जा सकती है वहीं वाईमैक्स में फिलहाल क्षमता 50 एमबीपीएस तक की है। लेकिन इसकी उन्नत तकनीक में यह क्षमता 1जीबीपीएस तक हो जाएगी। यह तो बाद की बात है फिलहाल तो यह तकनीक पीछे ही है।
वर्ष 2009 के आरंभ में ही संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की दो बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों वेरीजोन और एटीएंटी मोबिलिटी ने अमेरिका सहित अन्य देशों में एलटीई लान्च करने की घोषणा कर दी। जहां तक सार्वजनिक तौर पर एलटीई नेटवर्क को लांच करने की बात है तो टेलीकम्युनिकेशन कंपनी टेलीया सोनेरा द्वारा 14 दिसंबर 2009 को स्कैंडिनेविया की दो प्रमुख राजधनियों स्टाकहोम और ओस्लो में लांच किया गया। आज 33 देशों में 80 से भी ज्यादा आपरेटरों ने एलटीई लांच करने की  प्रतिबद्धता जाहिर की है। चीन ने भी एलटीई लांच करने की घोषणा की है।
भारत में यहां स्थिति साफ नहीं है। बीएसएनएल ने 2007 में ही वाईमैक्स पर प्रयोग शुरू कर दिया था। जहां सबसे पहले बेंगलुरु के कुछ क्षेत्र में इसे प्रायोगिक तौर पर लांच किया गया था। इसकी सफलता से उत्साहित होकर कंपनी ने राजस्थान में इसे बड़े पैमाने पर लांच किया। परंतु अब मौसम बदल गया है। सरकारी कंपनियों द्वारा जहां वाईमैक्स सेवा लागू करने की हो रही थी वहीं सूत्रों की मानें तो निजी आपरेटर एलटीई तकनीकी को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। वाईमैक्स के विकास से इंटेल हट जाने से इस तकनीक को बहुत बड़ा झटका लगा है। पहले वैश्विक स्तर पर कुछ देश वाईमैक्स की वकालत कर रहे थे वे भी पांव खींचने लगे हैं।


  

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