Tuesday, May 29, 2012

Nokia 808, Camera or Camera sensor


नोकिया 808 प्योर व्ह्यूव। कैमरा या कैमरा सेंसर

आखिरकर भारतीय बाजार में नोकिया 808 को लांच कर ही दिया गया। इस फोन को लेकर कई माह पहले से ही चर्चाएं शुरू हो गईं थीं। चर्चा का खास विषय इसका 41.0 मेगापिक्सल कैमरा है। कंपनी ने इसे जोर-शोर से प्रमोट किया। हर प्रमोशन में इसके कैमरे का ही जिक्र किया गया। कहीं भी इसके आपरेटिंग और स्टाइल के बारे में बात नहीं की गई। लेकिन इस प्रमोशन में एक बात है जो उपभोक्ताओं को अब भी उलझन में डाल रही है, और वह है कैमरा सेंसर। कंपनी ने हर प्रमोशन में कैमरे के बजाए कैमरा सेंसर का उपयोग किया है। अब तक जितने भी फोन का विज्ञापन प्रकाशित किए गए हैं उनमें सिपर्फ कैमरा का जिक्र किया जाता है न कि कैमरा सेंसर का। ऐसे में उपभोक्ताओं का यह सवाल लाजमी है कि आखिर कैमरा सेंसर है क्या? कैमरा और कैमरा सेंसर में कोई फर्क नहीं होता है, कैमरा सेंसर साधरण कैमरा ही है। पिक्चर लेने का काम कैमरा सेंसर ही करता है। ऐसा ही काम नोकिया प्योर व्यूव 808 का 41.0 मेगापिक्सल सेंसर करेगा। फोन 41.0 मेगापिक्सल पर तस्वीर लेने में सक्षम है और आपको 38.0 मेगापिक्सल क्वालिटी की स्पष्ट तस्वीर प्राप्त होगी। 

Monday, May 28, 2012

Google and Facebook Phones


गुगल फोन और फेसबुक फोन

 

पिछले कुछ साल में मोबाइल बाजार में बहुत तेजी से बदलाव हुआ है। सिंबियन आपरेटिंग को पीछे छोड़ एंडराड फोंस सत्ता पर काबिज हो चुके हैं। परंतु हाल के दिनों में जिस तरह की खबरें सुनने को मिली हैं उसके बाद कहा जा सकता है कि मोबाइल बाजार एक बार फिर से बड़े बदलाव के लिए तैयार है। इंटरनेट के दो शेरों ने अपने-अपने फोन लाने की घोषणा कर दी है। सबसे पहले विश्व प्रसिद्ध गूगल ने मोटोरला को खरीद लिया जहां अब मोटोरोला कि जगह गूगल के पफोन आपको देखने को मिलेंगे। वहीं हाल की यह खबर भी है कि सोशल नेटवर्किंग का बादशाह फेसबुक भी अब अपने फोन लाने का मन बना रहा है। फ़िलहाल इनके फोन के बारे में बहुत कुछ कहना तो मुश्किल है लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि जहां गूगल के फोन में डाटा कनेक्टिविटी के ढेर सारे विकल्प मिलेंगे वहीं फसेबुक फोन में सोशल नेटवर्किंग इंटीग्रेशन बेहतर होगा। जैसा कि पहले देखा गया है। गूगल वैश्विक बाजार में अब तक तीन पफोन उतार चुका है जिनमें एक एचटीसी और दो पफोन सैमसंग द्वारा निर्मित थे। वहीं वोडापफोन और एचटीसी खासतौर से फेसबुक फोन लांच कर चुके हैं जिनमें एसएनएस इंटीग्रेशन बहुत बेहतर था। परंतु गूगल और फेसबुक फोन में कमी का जिक्र करें तो वह था मल्टीमीडिया। जहां गूगल के पफोन में बेहतर मल्टीमीडिया इंटीग्रेशन होते हुए भी अच्छी क्वालिटी देखने को नहीं मिली थी वहीं फेसबुक फोन में बेहतर मल्टीमीडिया का अभाव ही था। डिजाइन के मामले में ये पफोन बहुत आकर्षक नहीं थे। इस वजह से गूगल और पफेसबुक फोन उपभोक्ताओं के बीच बहुत सराहे नहीं गए। हालांकि यह बात भी ध्यान देने योग्य है कि उस वक्त फोन के निर्माता खुद गूगल और फेसबुक नहीं थे। अब जब ये खुद फोन निर्माण करेंगे तो शायद इन कमियों को भी पूरा कर लिया जाएगा।

Friday, May 25, 2012

सैमसंग गैलेक्सी एस3 पास या फेल


सैमसंग गैलेक्सी एस और एस2 दोनों माडल भारतीय बाजार में हिट रहे। कंपनी ने 31 मई 2012 को इसके नए संस्करण गैलेक्सी एस3 को भी लांच करने की घोषणा कर दी है। अपने फीचर्स और लुक की वजह से ये फोन पहले ही बहुत वाहवाही बटोर चुका है। लेकिन अभी से ही यह आशा लगाना गलत होगा कि नया गैलेक्सी भी सपफलता के नए परचम ही लहराएगा। भारतीय बाजार में फोन की कीमत 35,000 रुपए से उपर होने के आसार हैं। ऐसे में गैलेक्सी एस3 को यदि किसी से कड़ी टक्कर मिलेगी तो वह कोई और नहीं बल्कि कि सैमसंग कंपनी का अपना गैलेक्सी नोट ही होगा। गैलेक्सी नोट आज भारतीय बाजार में अपनी जबरदस्त पकड़ बनाए हुए है। उच्च श्रेणी में उपभोक्ताओं द्वारा उसे बेहद सराहा जा रहा है। फिलहाल फोन की कीमत 32,000 रुपए है। एंडरायड आपरेटिंग आधरित इस डिवायस को मोबाइल फोन और टैबलेट के बीच के डिवायस के रूप में देखा जाता है। जहां टैबलेट के बारबर फीचर्स फोन में मिल रहे हैं और स्क्रीन के मामले में फोन से कहीं बड़ा है। अगर हम इसे फैबटेल कहें तो भी गलत नहीं होगा। 5.3  इंच की बड़ी स्क्रीनए बेहतर स्लीक डिजाइन और शानदार मल्टीमीडिया फीचर की वजह से लोगों ने इसे हाथो हाथ लिया।

अब जब गैलेक्सी एस3 के लांच की तैयारी हो चुकी है और यदि इसकी कीमत गैलेक्सी नोट से ज्यादा होती है तो इसके लिए परेशानी हो सकती है। हालांकि गैलेक्सी एस3 में स्मार्ट कालिंग और स्मार्ट स्टे आई ट्रैकिंग जैस कुछ एडवांस फीचर हैं लेकिन इसमें 4.8 इंच की स्क्रीन है जबकि गैलेक्सी नोट में 5.3 इंच की स्क्रीन उपलब्ध है। आज कल मोबाइल उपभोक्ताओं द्वारा बड़ी स्क्रीन को ज्यादा तवज्जो दिया जा रहा है। ऐसे में गैलेक्सी नोट का पलड़ा भारी हो जाता है। जहां तक मल्टीमीडिया की बात है तो दोनों फोन में लगभग समान फीचर हैं।
वहीं यदि गैलेक्सी एस3 को नोट से कम कीमत पर लांच किया जाता है तो इसका प्रभाव गैलेक्सी एस2 और गैलेक्सी नोट दोनों के विक्रय पर पड़ सकता है। गैलेक्सी नोट का बना.बनाया उपभोक्ता आधर खोने का भी डर है। हालांकि फोन लांच होने से पहले उपभोक्ता किस ओर रुख करेगा यह बताना मुश्किल है लेकिन सैमसंग के लिए गैलेक्सी एस3 की कीमत का निर्धारण  किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं। परंतु एक बात तो बता दूं कि सैमसंग गैलेक्सी एस की कीमत गैलेक्सी नोट से कम होना नामुमकिन लगता है।

ई- लर्निंग की शुरुआत

                                ( फोटो : गूगल)

यूजीसी (विश्वविधालय अनुदान आयोग) द्वारा दूरदर्शन पर प्रसारित होने वाला कार्यक्रम ज्ञानदर्शन आपको याद होगा। जहां वीडियो के माध्यम से विभिन्न पाठयक्रम की पढाई कराई  जाती थी। यह कार्यक्रम सभी छात्रों के लिए बहुत ज्ञानवर्धक था, खासकर उन लोगों के लिए जो ऐसे दूर-दराज इलाके में रहते थे और जहां शिक्षा के लिए हर जगह स्कूल नहीं थे। भारत सरकार का घर-घर में शिक्षा पाठशाला खुया यूं कहें कि शिक्षा के डिजिटलाइजेशन क्षेत्रा में यह पहली कोशिश थी। इंटरनेट और मोबाइल की व्यवस्था थी नहीं तो वीडियो को शिक्षा का जरिया बनाया गया। अब जबकि हमारे पास इन्टरनेट, टीवी, मोबाइल, कंप्यूटर और टैबलेट साहित कई अन्य साधन उपलब्ध हैं तो ऐसे में शिक्षा को डिजिटल करने की पूरजोर कोशिश हो रही है। इस कोशिश में सबसे बड़ा साधन बनकर उभरा है टैबलेट। डायरी के आकार का यह डिवायस न सिर्फ आपका कापी-किताब हैं बलिक शिक्षक भी है। इंटरनेट कनेकिटविटी और वीडियो कांफ्रंसिंग  जैसी चीजों ने इसे और भी खास बना दिया। वहीं सबसे खास बात कि आज यह आम बजट में भी उपलब्ध है। आज स्कूल से लेकर कालेज तक छात्रों को टैब्लेट देने की चर्चा हो रही है। जहां छात्रा कापी-किताब के बजाए टैबलेट पर पढाई करेंगे। 

टैबलेट से पढाई
टैबलेट मोबाइल और कंप्यूटर के बीच का डिवायस है जो एक डायरी के समान है। इसकी क्षमता डिवाइस की कांफीग्रेशन पर निर्भर करती है। टैबलेट में भी कुछ ऐसा ही है लेकिन पिफर भी कुछ चीजें हों जो इनमें समान है। टैबलेट में सिम, वाई -फाई या डान्गल के माध्यम  से इंटरनेट का उपयोग किया जा सकता है और जब इंटरनेट है तो सूचना का संसार है। वहीं इसमें नोटबुक की तरह ही के नोट बना सकते हैं और उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं। ई-बुक रीडर भी एक आम फीचर है जहां आन लाइन उपलब्ध बुक को डिवायस में पढ़ सकते हैं। आज भारतीय बाजार में 7 इंच कपैसीटिव   और रजेसिटिव टच स्क्रीन वाले टैबलेट उपलब्ध हैं इसमें आप अपने बुक की आन लाइन लाइब्रेरी बना सकते हैं या आन लाइन उपलब्ध बुक की खरीदारी भी कर सकते हैं। इसके अलावा आप वीडियो कालिंग और वीडियो कांफ्रंसिंग का भी लाभ टैबलेट में ले सकते हैं। यदि सिम कनेकटिविटी है तो ब्राउजिंग के साथ कालिंग का भी लाभ की जा सकती है। यह तो रही सिर्फ पढाई की बात लेकिन इसके अलावा भी टैबलेट कर्इ कार्य करने में सक्षम है। सबसे अच्छी बात है कि इनमें एपिलकेशन सपोर्ट बहुत ज्यादा होता है इसलिए अपने दैनिक कार्यों जैसे बैंक-लेन देने, ईमेल, टिकट बुकिंग, बिल पेमेंट और खरीदारी जैसे कार्य भी कर सकते हैं। 

Tuesday, May 22, 2012

गैलेक्सी 2 को आईसक्रीम का चस्का

सैमसंग गैलेक्सी एस2 को लांच हुए भले ही एक साल से ज्यादा हो गया बावजूद इसके फोन अब तक बाजार में अपनी पकड़ बनाए हुए है। डुअल कोर प्रोसेसर और बेहतर स्क्रीन रेजल्यूशन इसके उपयोग को और भी शानदार बनाते हैं। हाल में कंपनी ने इसके नए संस्करण गैलेक्सी एस3 को लांच करने की घोषणा कर दी है। ऐसे में कुछ का मानना था कि इसके बाद कंपनी एस2 को बंद कर दे। वहीं सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कंपनी फोन के कीमत में भारी कटौती करने का मन बना रही है। अभी दो अलग-अलग तरह की बातें हो ही रही थी कि इसी बीच नई खबर सबको चैंकाने वाली है। कंपनी एस2 के नए यूनिट को एंडरायड के नए संस्करण 4.0 आइसक्रीम सैंडविच पर पेश करेगी और कंपनी यह योजना गैलेक्सी एस2 के मांग को देखते हुए उठा रही है। वहीं अप्रैल 2012 के बाद जो यूनिट भारत में इंपोर्ट की गई है यदि उसमें आईसक्रीम सैंडविच आपरेटिंग नहीं तो इसे ओटीए (ओवर द एयर) के जरीए आसानी से अपग्रेड कर सकते हैं।
चाहे जो भी हो एस2 को लेकर लगाए जा रहे सभी कयासों से एक बात तो सापफ है कि फिलहाल गैलेक्सी एस3 आने के बाद भी कंपनी एस2 को बंद करने के मूड में नहीं है।

Monday, May 21, 2012

3जी के बाद 4जी

आपसे अगर यह पूछा जाए कि हाल ही आई हालीवूड फिल्म एवेंजर में सबसे शक्तिशाली कैरेक्टर कौन है,  तो आप थोड़े असमंजस में पड़ जाएंगे। कौन ज्यादा ताकतवर है इस पर फैसला करना बेहद मुश्किल है। हर कैरेक्टर की अपनी एक अद्वितीय शक्ति है जो इस खासियत की वजह से मशहूर है। ऐसे में किसी एक का चुनाव करना टेढ़ी खीर है। आज भारतीय मोबाइल जगत के लिए भी स्थितियां कुछ ऐसी ही हो गई हैं जहां उन्हें आइअर्न मैन और हलक  के समान दो बेहतर तकनीक में से किसी एक का चुनाव करना है और ये तकनीक हैं एलटीई (लान्ग टर्म इवाल्यूशन) और वाईमैक्स।

3जी तकनीकी से अब तक आप रू-ब-रू हो चुके हैं। वीडियो कालिंग, बगैर बफरिंग के वीडियो स्ट्रीमिंग और तेज डाउनलोडिंग इससे संभव हो सकी। लेकिन इस सबके बावजूद मैं इतना कहूंगा कि यह तकनीक का अंत नहीं है बल्कि यह तो शुरुआत है। 3जी के माध्यम से फिलहाल 3.7, 7.2, 14 या अधिकतम 21 एमबीपीएस तक की गति से मोबाइल पर इंटरनेट चलाया जा सकता है। लेकिन एलटीई और वाईमैक्स में यह क्षमता कई गुणा ज्यादा है। इन तकनीक से मोबाइल पर 100 एमबीपीएस या उससे भी ज्यादा गति से डाटा प्राप्त की जा सकती है।

चलें 4जी की ओर
3जी सेवा के लांच के साथ ही 4जी सेवा की तैयारियां शुरू हो चुकी है। हाल ही में एयरटेल ने 4 जी की  कोलकत्ता और  बंगलुरु  सर्किल में शुरुवात कर दी है. फिलहाल अभी इस सेवा का इस्तेमाल डाटा के लिए ही किया जा रहा है.  4जी सेवा  के तहत एलटीई और वाई मैक्स दो तरह की सेवाएं आती हैं। ऐसे में भारत सहित पूरे विश्व में इस बात को लेकर असमंजस की स्थिति है कि कौन सी तकनीक बेहतर है और किसे लागू किया जाए।  क्षमता के मामले में न तो एलटीई कम है और न ही वाईमैक्स। इस बहस पर आगे बढ़ने से पहले जरा एक नजर दोनों तकनीक पर डाल लें।
 

वाईमैक्स
वाईमैक्स वायरलेस ब्राडबैंड एक्सेस तकनीक है। यह वाई-पफाई तकनीक 802.11 के समान ही है। वाईमैक्स का आशय है ‘वर्ल्ड वाइड इंट्रोपरेबिलिटी फार माइक्रोवेब एक्सेस’। यह एक वायरलेस कम्युनिकेशन माध्यम है जो आईईईई 802.16 नेटवर्क आधारित है। इस तकनीक के विकास में नोकिया, एटीएंडटी और वेरीजोन सरीखी कंपनियों का बेहद योगदान है। 1990 के दशक में इन्होंने इसके विकास की नींव रखी। ये कंपनियां ऐसी तकनीक निर्मित करना चाहती थीं जिसकी नेटवर्क और डाटा क्षमता वर्तमान नेटवर्क से कई गुणा ज्यादा हो। इस कोशिश के तहत इंटल कापोरेशन ने वाई-फाई की उन्नत तकनीक वाईमैक्स का विकास किया। वर्ष 2002 में सर्वप्रथम यह तकनीक अस्तित्व में आई। वाईमैक्स सेवा वैश्विक स्तर पर प्रमोट करने के लिए वाईमैक्स फोरम का गठन किया गया। जो इसके विकास के लिए कार्य कर रहा है।  

वाईमैक्स वाई-फाई की ही एक उन्नत तकनीक है। वाई-फाई के माध्यम से जहां 30 से 100 मीटर तक के क्षेत्र में बिना किसी केबल नेटवर्क का लाभ ले सकते हैं, वहीं वाईमैक्स में नेटवर्क क्षेत्र कई गुणा बढ़ जाता है। ब्राडबैंड वायरलेस एक्सेस ;बीडब्ल्यूए के तहत एक फिक्स्ड स्टेशन से 50 किलोमीटर के क्षेत्र तक नेटवर्क जोन तैयार किया जा सकता है। जबकि एक मोबाइल स्टेशन से 10 से 15 किलोमीटर क्षेत्र तक नेटवर्क जोन तैयार किया जा सकता है। वहीं यह तकनीक इंटरनेट और सेल्यूलर दोनों नेटवर्क पर कार्य करती है इसलिए मोबाइल, कंप्यूटर और लैपटाप को भी वाईमैक्स से जोड़ा जा सकता है। हालांकि वाईमैक्स का लाभ लेने के लिए आवश्यक है कि डिवायस भी वाईमैक्स इनेबल हो। 

एलटीई
एलटीई का आशय है लान्ग टर्म इवाल्यूशन। यह मोबाइल नेटवर्क की नई तकनीक है। यह एक वायरलेस ब्राडबैंड तकनीक है जो मोबाइल नेटवर्क पर कार्य करती है। जीएसएम/ऐज और यूएमटीएस/एचएसएक्सपीए नेटवर्क पर आधारित  तकनीक बेहतर डाटा क्षमता के लिए जानी जाती है। एलटीई सेवा के लिए 1.25  मेगाहर्ट्ज से लेकर 20 मेगाहर्ट्ज बैंडविथ ;स्पैक्ट्रम तक का उपयोग किया जा सकता है। भारत में एलटीई को 2.3 गीगाहर्ट्ज टीडीडी स्पैक्ट्रम पर लांच करने की तैयारी की जा रही है। इस तकनीक के माध्यम से 50 मेगा बिट्स प्रति सेकेंड की दर से अपलिंकिंग और 100 मेगा बिट्स प्रति सेकेंड की दर से डाउनलिंकिंग गति पाई जा सकती है।
एलटीई तकनीक को 3जीपीपी ;थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट के तहत तैयार किया गया है। इस प्रोजेक्ट को विश्व की प्रमुख टेलीकाम संस्थाओं  इंटरनेशनल मोबाइल टेलीकम्युनिकेशन और इंटरनेशनल टेलीकम्युनिकेशन यूनियन द्वारा मानक तय किया गया है जिससे कि वैश्विक स्तर पर जीएसएम सेवा के माध्यम से यह तकनीक मुहैया कराई जा सके। एलटीई नेटवर्क को पहली बार जब लांच किया गया तो वह 3.9जी आधरित थी जो 4जी क्षमता के मानकों की बराबरी करने में सक्षम नहीं थी। लेकिन यह 4जी या नवीन एलटीई की ओर पहला कदम था। कुछ समय पश्चात नवीन एलटीई को और बेहतर क्षमता के साथ लांच किया गया जो बेहतर गति से डाटा हस्तांतरण करने में सक्षम है।


एलटीई या वाईमैक्स
जहां तक डाटा क्षमता की बात आती है तो फिलहाल एलटीई आगे है। एलटीई के माध्यम से 100 एमबीपीएस की इंटरनेट गति पाई जा सकती है वहीं वाईमैक्स में फिलहाल क्षमता 50 एमबीपीएस तक की है। लेकिन इसकी उन्नत तकनीक में यह क्षमता 1जीबीपीएस तक हो जाएगी। यह तो बाद की बात है फिलहाल तो यह तकनीक पीछे ही है।
वर्ष 2009 के आरंभ में ही संयुक्त राष्ट्र अमेरिका की दो बड़ी मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियों वेरीजोन और एटीएंटी मोबिलिटी ने अमेरिका सहित अन्य देशों में एलटीई लान्च करने की घोषणा कर दी। जहां तक सार्वजनिक तौर पर एलटीई नेटवर्क को लांच करने की बात है तो टेलीकम्युनिकेशन कंपनी टेलीया सोनेरा द्वारा 14 दिसंबर 2009 को स्कैंडिनेविया की दो प्रमुख राजधनियों स्टाकहोम और ओस्लो में लांच किया गया। आज 33 देशों में 80 से भी ज्यादा आपरेटरों ने एलटीई लांच करने की  प्रतिबद्धता जाहिर की है। चीन ने भी एलटीई लांच करने की घोषणा की है।
भारत में यहां स्थिति साफ नहीं है। बीएसएनएल ने 2007 में ही वाईमैक्स पर प्रयोग शुरू कर दिया था। जहां सबसे पहले बेंगलुरु के कुछ क्षेत्र में इसे प्रायोगिक तौर पर लांच किया गया था। इसकी सफलता से उत्साहित होकर कंपनी ने राजस्थान में इसे बड़े पैमाने पर लांच किया। परंतु अब मौसम बदल गया है। सरकारी कंपनियों द्वारा जहां वाईमैक्स सेवा लागू करने की हो रही थी वहीं सूत्रों की मानें तो निजी आपरेटर एलटीई तकनीकी को ज्यादा तवज्जो दे रहे हैं। वाईमैक्स के विकास से इंटेल हट जाने से इस तकनीक को बहुत बड़ा झटका लगा है। पहले वैश्विक स्तर पर कुछ देश वाईमैक्स की वकालत कर रहे थे वे भी पांव खींचने लगे हैं।