Friday, March 9, 2012

आज का युग टैबलेट युग

तकनीकी की फितरत हमेशा आगे बढते रहना है. इस विस्तार की बात करें तो एक समय हम सूचना और संचार के लिए रेडियो पर निर्भर थे. यह रेडियो का ज़माना था. उसके बाद तकनीकी हमें टीवी के युग में लेकर गई. वर्तमान में हम कंप्यूटर और मोबाइल के युग में जी रहें हैं और अब हम तकनीकी के सहारे टैबलेट की दुनिया में प्रवेश कर चुके हैं. जिस तरह मोबाइल कंपनियां टैबलेट की ओर रुख कर रही हैं इसे देखते हुए अगर इसको टैबलेट युग कहें तो कोई आश्चर्य की बात नहीं होगी। टैबलेट का नाम आपने जरुर सुना होगा. पिछले साल दो साल में यह ज्यादा चर्चित रहा है। शायद अब तक टैबलेट आपके सामने से गुजर चुका हो, आपने कहीं इसे देखा हो या फिर इसके बारे में कहीं पढ़ा हो। आकाश टैबलेट आने के बाद यह डिवायस आम होने जा रहा है जहां आप न सिर्फ इसे देखेंगे बल्कि इसका भरपूर उपयोग करेंगे.

टैबलेट का आगाज़
भारत में पिछले साल भर से टैबलेट सुर्खियों में रहा है लेकिन तकनीक की दुनिया में यह नाम नया नहीं है. लेनेवो और तोशिबा जैसी कंपनियां काफी समय से टैबलेट निर्माण में जुटी हैं. शुरुआत में टैबलेट थोड़े वजनदार और मोनोक्रोम स्क्रीन के साथ थे. वहीं आज टैबलेट का उपयोग बिजनेस क्लास, पत्राकार और तकनीक से जुड़े लोग कर रहे हैं. लेकिन इसके निर्माण का उद्देश्य सिर्फ यही नहीं था. बल्कि इसे सभी वर्ग के बच्चों और शिक्षा के विकास के लिए बनाया गया था. टैबलेट के विकास की कहानी 1960 से शुरू होती है. जहां ऐलेन के ने जिरॉक पालो आल्टो रिसर्च सेंटर में पर्सनल कंप्यूटर फार चिल्ड्रेन आफ आल एज नाम से अवधरणा पेश की। उन्होंने एक पेपर पर टैबलेट का डायग्राम बनाया जिसे डायना बुक का नाम दिया गया था. इसमें इस बात का भी जिक्र किया था कि यह डिवायस शिक्षा के विकास में विशेष रूप से कारगर साबित होगा. यह एक ऐसी किताब होगी जिसके माध्यम से हम आसानी से कहीं भी किसी से जुड़ सकते हैं और शब्दों का संपादन इत्यादि आसान होगा. जब जी चाहा इसे समेटा और चलते बने. टैबलेट की शुरुआत हुई तो कुछ को कीपैड के साथ तो कुछ को स्टायलस के साथ पेश किया गया. जिसे पेन आधरित पीसी भी कहा गया. इनमें वर्चुअल कीबोर्ड नहीं होता था और यह टैबलेट हैंडराइटिंग रिकाग्नेशन सपोर्ट करने में सक्षम थे. इसके बाद धीरे-धीरे इसका विकास किया गया और आधुनिक टैबलेट तैयार किया गया जो उपयोग में आसान होने के साथ कई नवीन फीचर्स से लैस है.

टैबलेट क्यों है खास
मोबाइल और कंप्यूटर के संयोग से टैबलेट का जन्म हुआ. जहां आप मोबिलिटी के साथ कंप्यूटिंग का भी मजा ले सकते हैं. मोबाइल को वर्ड और एक्सेल जैसे फीचर्स से लैस तो कर दिया गया लेकिन छोटी स्क्रीन की वजह से आज भी यह असहज है. ऐसे में टैबलेट में इसका बेहतर रूप से उपयोग किया जा सकता है. वहीं डिजाइनिंग, एडिटिंग और मैसेजिंग भी टैबलेट में मोबाइल की अपेक्षा आसान हो जाते है. बड़ी स्क्रीन की वजह से वीडियो और गेमिंग का अनुभव ही बदल जाता है. आप उन गेम्स का भी मजा ले सकते हैं जो मोबाइल में असहज होते हैं. टैबलेट की मैमोरी क्षमता ज्यादा है. और जहां ज्यादा दिमाग है, जाहिर है, वहां आप ज्यादा चीजें रख सकते
हैं. ज्यादा से ज्यादा एप्लिकेशन, ज्यादा से ज्यादा गेम्स इत्यादि. इन सब खासियतों ने टैबलेट को और भी खास बना दिया. टैबलेट का क्रेज बढ़ाने का सबसे बड़ा श्रेय जाता है एपल को। कंपनी ने वर्ष २०१० एपल आई पैड उतारा था. आईओएस आपरेटिंग आधरित इस टैबलेट को बेहतर टच के साथ पेश किया गया था. इसने टैबलेट का अनुभव ही बदल दिया. मल्टीटच के साथ ज्यादा से ज्यादा एप्लिकेशन का सपोर्ट. अब आप टचस्क्रीन पर कीपैड की तरह टाइप कर सकते
हैं. वहीं एंडरायड आपरेटिंग ने इस क्रेज को और भी बढ़ा दिया. ओपेन आपरेटिंग सिस्टम होने की वजह से एंडरायड के लिए ज्यादा से ज्यादा एप्लिकेशन तैयार किए गए. गूगल द्वारा तैयार इस आपरेटिंग ने टैबलेट निर्माण को और भी आसान बना दिया। यही वजह है कि आज ज्यादातर टैबलेट इसी आपरेटिंग पर आधरित हैं.

टैबलेट ट्रेंड
आज बाजार टैबलेट से भरे पड़े हैं. फीचर्स से भरे इस डिवायस को जब स्टाइल का साथ मिला तो लोगों ने हाथोहाथ लिया. इसी का परिणाम है कि आज लगभग हर मोबाइल निर्माता टैबलेट की ओर रुख कर रहा है. टैबलेट को प्रचलन में आने का सबसे बड़ा कारण यदि माने तो वह है कनेक्टिविटी. लोगों को हर वक्त इंटरनेट का साथ चाहिए. कंप्यूटर को लेकर चल नहीं सकते और मोबाइल पर स्क्रीन छोटी होने की वजह से बेहतर इंटरनेट सेवा ले नहीं सकते. ऐसे में टैबलेट उनके सामने बेहतर विकल्प होता है. हाथों में डायरी की तरह या कोट की जेब में डालकर निकल पड़े. कनेक्टिविटी के लिहाज से फिलहाल बाजार में दो तरह के टैबलेट उपलब्ध् हैं. एक वाई-फाई और दूसरा 3जी +वाई-फाई. वाई-फाई टैबलेट में सिम का विकल्प नहीं होता है. वाई-फाई टैबलेट में बाकी कार्य तो आप कर सकते हैं लेकिन इंटरनेट का मजा वहीं ले सकते हैं. जहां वाई-फाई हो. वाई-फाई से इंटरनेट कनेक्ट किया और हो गए शुरू. वहीं 3जी+वाई-फाई माडल में आप वाई-फाई से इंटरनेट तो चला ही सकते हैं, साथ ही, इसमें सिम का विकल्प भी होता है. जहां आप राह चलते सिम के माध्यम से इंटरनेट सेवा का लाभ ले सकते हैं. चूंकि यह 3जी आधरित होता है इसलिए हर जीपीआरएस की अपेक्षा तेज गति से इंटरनेट गति पाई जा सकती है. जहां तक टैबलेट ट्रेंड की बात है तो टच स्क्रीन टैबलेट का ही बोलबाला है लेकिन अब टच के साथ कीपैड वाले टैबलेट भी बाजार में आ चुके हैं. अर्थात टच फीचर से यह लैस होगा ही साथ ही आप अलग से कीपैड का उपयोग कर सकते हैं.

टैबलेट की बहार
जैसा कि हम बात कर चुके हैं कि पिछले एक साल में ही टैबलेट का जिक्र ज्यादा सुनने को मिला है. लेकिन इस एक साल में ही टैबलेट के क्षेत्र में गजब का बदलाव देखने को मिला है. देखते ही देखते आज टैबलेट आम हो चुका है. चालीस हजार और पचास हजार से शुरू हुआ यह सफर आज 4 हजार तक आ चुका है. मोबाइल की तरह ही इस क्षेत्रा में भी यह अद्भुत बदलाव लाने का श्रेय भारतीय कंपनियों को जाता है . कुछ कुछ समय पहले एपल ने भारतीय बाजार में आईपैड टू उतारा था. तीन माडलों में उपलब्ध् इस डिवायस की कीमत २९,५०० से ३९,५०० तक है और आज एपल आईपैड ३ भी बाज़ार में पेश कर चुका है.वहीं सैमसंग ने टैब माडल उतारा था और हाल ही में कंपनी ने टैब १०.१ भारतीय बाजार में पेश किया है. जिसकी कीमत ३६,२०० है. इसी तरह मोटोरोला जूम, एचटीसी फ्रलायर, ब्लैकबेरी प्लेबुक भी उतारा गया जिनकी कीमत क्रमशः ३९,९९०, ३७,००० और २६,५०० रुपए है. अब आप यही सोच रहे होंगे कि अभी यह कहा गया कि टैबलेट अब आम लोगों के लिए उपलब्ध् है तो यह कीमत तो आम लोगों के लिए नहीं है. लेकिन इस कहानी का दूसरा भाग तो अभी बाकी है. भारत में मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी रिलायंस कम्यूनिकेशंस ने हाल ही में १२,९९९ रुपए में उतारा है. इसके साथ ही कंपनी ने टैबलेट के लिए विशेष डाटा प्लान भी लांच किया है. भारत की प्रमुख बेसिक फोन निर्माता कंपनी बीटेल ने मोबाइल लांच
करने में भले ही देर कर दी थी लेकिन कंपनी ने टैबलेट की संभावना को जाने नहीं दिया और हाल ही में उसने भी टैबलेट उतारा है जिसकी कीमत ९,९९९ रुपए है. परंतु इन सबको पीछे छोड़ते हुए लक्ष्मी एक्सेस कम्युनिकेशन सिस्टम प्राइवेड लिमिटेड ने ९९ डालर में मैग्नम टैबलेट भारतीय बाजार में उतारा है। भारतीय रुपए के अनुसार इस टैबलेट की कीमत लगभग 4,500 रुपए होगी. भारत सरकार के समर्थन के पेश किया गया आकाश टैबलेट ने इस क्रिन्ती की आग को और दहकने का काम किया. दुनिया का सबसे सस्ता टैबलेट भारतीय बाज़ार में उतरा. आकाश की कीमत २,७५० रुपए है. जल्द ही आपको भारतीय संचार निगम लिमेटेड के तीन टैबलेट मॉडल देखने को मिलेंगे. इनकी कीमत ३,२५० रुपए, १०,९९९ रुपए और १३,५०० है. इस लान्च के साथ ही टैबलेट के बाजार में एक नई जंग शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में अब इससे कहीं सस्ते टैबलेट आपको देखने को मिल सकते हैं.

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