Friday, February 15, 2013

चुपके-चुपके रात दिन चार्जर लगाना याद है


चुपके-चुपके रात दिन चार्जर लगाना याद है
हमको दिन भर बैटरी चलने का ज़माना याद है

तुझसे मिलते ही वो कुछ बेबाक हो जाना मेरा
और बिना सिम कार्ड कटाए फ़ोन चलाना याद है

हमको दिन भर बैटरी चलने का ज़माना याद है

चोरी चोरी हम जो करते थे तुम्ही पर कब कहाँ
मुद्दतें गुजरीं पर टेक्सटों का ज़माना याद है

हमको दिन भर बैटरी चलने का ज़माना याद है

दोपहर की धुप में एक टेक्स्ट पढने के लिए
वो बिना तकलीफ के डिस्प्ले पर पढना याद है

हमको दिन भर बैटरी चलने का ज़माना याद है

खींच लेना वो मेरा मोबाइल का कवर दफ्फतन
और बैटरी खींच के रीस्टार्ट कराना याद है

हमको दिन भर बैटरी चलने का ज़माना याद है

चुपके-चुपके रात दिन चार्जर लगाना याद है
हमको दिन भर बैटरी चलने का ज़माना याद है